
चिराग पासवान की वापसी से बिहार में एनडीए को नुकसान या फायदा? सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
विगत 18 जुलाई की तारीख देश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही. इस दिन दोपहर में बेंगलुरु में जहां भाजपा के विरोधी दलों जहां एक नया मोर्चा INDIA बनाया, वहीं इसी दिन शाम को एनडीए के घटक दलों की बैठक (NDA Meeting) हुई. इस मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) स्वयं उपस्थित रहे और कई नेताओं से मुलाकात की. तमाम बड़े-छोटे नेताओं की मौजूदगी में सबसे अधिक हाइलाइटेड लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान रहे. चिराग ने जहां पीएम मोदी के चरण स्पर्श किए वहीं, पीएम मोदी ने चिराग के गाल थपथपाते हुए उन्हें गले भी लगा लिया.
अब जब चिराग पासवान औपचारिक तौर पर एनडीए में आ गए हैं तो बिहार की सियासत के लिए इसे अहम बदलाव माना जा रहा है. हालांकि, सबकी जुबान पर यही बात है कि इससे बीजेपी (BJP) को फायदा होगा या नुकसान? इसी बात को लेकर एबीपी ने सी वोटर (ABP Cvoter Survey) के साथ एक सर्वे कराया है जिसके परिणाम आने वाली राजनीति के लिए काफी कुछ संकेत करते हैं.
एबीपी ने सी वोटर के साथ मिलकर जो सर्वे कराया कराया है इसके परिणाम भी सामने आए हैं जो बेहद अहम हैं. दरअसल, सर्वे के दौरान लोगों से पूछा गया कि चिराग पासवान के एनडीए में आने से बीजेपी को फायदा होगा या नुकसान? इस सर्वे के में 50 प्रतिशत लोगों ने माना कि बीजेपी को फायदा पहुंचेगा. वहीं, 37 प्रतिशत लोगों ने माना कि इससे बीजेपी को फायदा नहीं होगा. जबकि, 13 प्रतिशत लोगों की इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं थी.
यहां यह बता दें कि एबीपी न्यूज और सी वोटर ने ये सर्वे त्वरित तौर पर किया है. पिछले हफ्ते किए गए सर्वे में 4 हजार 29 लोगों से बात की गई और समें मार्जिन ऑफ एरर प्लस माइनस 3 से प्लस माइनस 5 प्रतिशत तक हो सकता है. यहां आपको यह भी जानकारी दे दें कि वर्ष 2020 के विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी LJP में तभी टूट नहीं हुई थी और तब इनका वोट प्रतिशत 5.66 था. जबकि भाजपा को 19.46 प्रतिशत वोट शेयर मिला था.
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए एनडीए और नवगठित मोर्चा ‘इंडिया’ दोनों गठबंधन मजबूत बनाने में लगे हुए हैं. दोनों का बिहार की तरफ खास नजर है. बिहार में अभी महागठबंधन में छह दल हैं तो एनडीए में पांच दल हैं. इन सभी दलों के विधान सभा चुनाव 2020 के वोट प्रतिशत को देखें तो एनडीए का वोट शेयर 27.78 प्रतिशत है. जबकि महागठबंधन के सभी छह दलों को मिला दिया जाए तो इस खेमे के लिए 52.62 प्रतिशत वोट है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए में चिराग के आने से बिहार की राजनीति में क्या प्रभाव पड़ेगा?