*नीमच*
*डॉ बबलु चौधरी*
सुविख्यात-आरोग्य तीर्थ स्थल भादवामाता के ग्राम में होली-धुलेंडी का पर्व एकता का प्रतिक माना जाता है।
जिसे पूरे ही देश में आपसी भाईचारे सारे गिले शिकवे
को भूलकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर इस पर्व
को परंपरागत तरीके से गांव में होली मिलन समारोह के रुप में मनाया जाता है। जिसमें सभी ग्रामीण बच्चों युवा एवं वृद्धजन बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर इस परंपरा को लेकर कि अगर गांव में किसी के घर कोई मृत्यु (मौत)हो जाती है तो होली के पावन अवसर पर सभी ग्रामीण मिलकर उस घर पर जाकर रंग गुलाल लगाकर उस परिवार को सांत्वना देते है।
इसी प्रकार से सभी ग्राम वासी ग्राम-पटेल के साथ इकट्ठा होकर ग्राम के वरिष्ठ जनों के घर या मुख्य चौराहे पर जाकर होली मिलन समारोह कार्यक्रम करते है। व बड़े ही खुशी के साथ ढोल की थाप पर सभी थिरकते हुए नोट घुमाकर ढोल रखते है।
और एक दूसरे को गले लगाकर रंग गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते है इस मौके पर गांव के सभी बच्चों में बड़ी खुशी की लहर,उत्साह देखने को मिलता है।जहां पर बच्चे अपनी अपनी टोलियां बनाकर पिचकारी से रंग भरकर बड़े उत्साह के साथ धुलेंडी पर्व खेलते नजर आते है।
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