मंदसौरमंदसौर जिला
दशपुर रंगमंच द्वारा हिन्दी दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया

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‘‘हिन्दी अधर में झूल रही है बार-बार‘‘
मन्दसौर। दशपुर रंगमंच द्वारा हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
प्रारंभ में नन्दकिशोर राठौर ने मॉ सरस्वती की आराधना के बाद कविता पढ़ी ‘‘आज तिरंगा लहराया तो फिर नैन भर आये’’। उसके पश्चात् चंदा डांगी ने हिन्दी की व्यथा पर कविता ‘‘हिन्दी अधर में झूल रही है बार-बार‘‘ प्रस्तुत की। हरिओम बरसोलिया ने कविता ‘‘हम स्वतंत्र हो गये नाम से फिर भी हिन्दी बनी रही गुलाम सी‘‘ पढ़कर सबका ध्यान हिन्दी की वर्तमान स्थिति को इंगित किया।
अभय मेहता ने रचना ‘‘खून जिगर से दिल की कलम से लिखा है खत तेरे नाम‘‘ सुनाई। वहीं अनुष्का मांदलिया ने रचना ‘‘मैं दुनिया जहां मे सुकुन ढूंढती रही, पर मिला तो मॉ की गोद में’’ पढ़कर मॉ के आंचल में मिलने वाले सुकुन को दर्शाया। कवि ध्रुव तारा ने कविता ‘‘मेरी भाषा हिन्दी भाषा’’ सुनाकर हिन्दी की महत्ता बताई। नरेन्द्र भावसार ने कविता ‘‘भाषाएं सब बहने है, हिन्दी मॉ है, बाकी मौसी है’’ सुनाकर हिन्दी हमारी मूल भाषा होने की बात कही। आशीष मराठा ने राग दरबारी में ‘‘ ए री सखी मंगल गाओ री’’ गाया। ललित बटवाल ने हरिवंश राय बच्चन की कविता का पाठ किया।
कार्यक्रम में महादेवी वर्मा की दो दिन पहले पुण्यतिथि थी उनको भी श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम में राजकुमार अग्रवाल, स्वाति रिछावरा ने भी प्रस्तुतिदी। दिनेश कल्याण, सरला कल्याणी, डॉ. प्रवीण मण्डलोई सहित कई श्रोता काव्य गोष्ठी में उपस्थित रहे। संचालन आशीष मराठा ने किया एवं आभार ललिता मेहता ने माना।
प्रारंभ में नन्दकिशोर राठौर ने मॉ सरस्वती की आराधना के बाद कविता पढ़ी ‘‘आज तिरंगा लहराया तो फिर नैन भर आये’’। उसके पश्चात् चंदा डांगी ने हिन्दी की व्यथा पर कविता ‘‘हिन्दी अधर में झूल रही है बार-बार‘‘ प्रस्तुत की। हरिओम बरसोलिया ने कविता ‘‘हम स्वतंत्र हो गये नाम से फिर भी हिन्दी बनी रही गुलाम सी‘‘ पढ़कर सबका ध्यान हिन्दी की वर्तमान स्थिति को इंगित किया।
अभय मेहता ने रचना ‘‘खून जिगर से दिल की कलम से लिखा है खत तेरे नाम‘‘ सुनाई। वहीं अनुष्का मांदलिया ने रचना ‘‘मैं दुनिया जहां मे सुकुन ढूंढती रही, पर मिला तो मॉ की गोद में’’ पढ़कर मॉ के आंचल में मिलने वाले सुकुन को दर्शाया। कवि ध्रुव तारा ने कविता ‘‘मेरी भाषा हिन्दी भाषा’’ सुनाकर हिन्दी की महत्ता बताई। नरेन्द्र भावसार ने कविता ‘‘भाषाएं सब बहने है, हिन्दी मॉ है, बाकी मौसी है’’ सुनाकर हिन्दी हमारी मूल भाषा होने की बात कही। आशीष मराठा ने राग दरबारी में ‘‘ ए री सखी मंगल गाओ री’’ गाया। ललित बटवाल ने हरिवंश राय बच्चन की कविता का पाठ किया।
कार्यक्रम में महादेवी वर्मा की दो दिन पहले पुण्यतिथि थी उनको भी श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम में राजकुमार अग्रवाल, स्वाति रिछावरा ने भी प्रस्तुतिदी। दिनेश कल्याण, सरला कल्याणी, डॉ. प्रवीण मण्डलोई सहित कई श्रोता काव्य गोष्ठी में उपस्थित रहे। संचालन आशीष मराठा ने किया एवं आभार ललिता मेहता ने माना।