आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

निंदा करने वाले का हमें विरोध नहीं करना चाहिए ,जो है जिंदा उसी की होती है निंदा- पं.शास्त्री जी

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सीतामऊ। श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस ज्ञान अमृत पान करते हुए पंडित भीमाशंकर जी शास्त्री ने कहा कि वजनदार लोगों के काम भोपाल से होते हैं पर भजनदार लोगों के काम गोपाल के यहां से घर बैठे हो जाते हैं।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि भगवान परमपिता है जिस प्रकार से हम अपने बेटे बेटियों का अहित नहीं कर सकते हैं ऐसे ही मेरा सांवरा परमपिता अहित नहीं होने देता है सबका हित करता है ।
शास्त्री जी ने इशारों के माध्यम से बताया कि कुछ लोग धन कमाने गिनने में लगे हुए हैं और जो लोग भजन माला मोती राम नाम गिननेमे हैं वह कभी दुखी नहीं होते हैं।
शास्त्री जी ने कहा कि यूं तो हम अपने काम के लिए तथा पूरे संसार को खुश करने के लिए 24 घंटे निकाल देते हैं पर अपने सांवरा के लिए प्रतिदिन केवल 15 मिनट देखकर देखिए आपका जीवन आनंदमय हो जाएगा। शास्त्री जी ने आगे कहा कि अभी कुंभ राशि पर भगवान शनि देव की साढ़ेसाती चल रही है और सीतामऊ की राशि भी कुंभ है अब आज शनि देव के मंदिर पर कलश चढ़ जाएगा इसके बाद सब अच्छा ही अच्छा होगा पूरे क्षेत्र पर शनि देव की सौम्या दृष्टि बनी रहेगी।
शास्त्री जी ने कहा कि आज शनिवार है और शनि देव के साथ हनुमान जी का भी वार है यहां हनुमान जी उत्तर पूर्व मुख में बाल रूप में विराजमान है हम बालाजी से प्रार्थना करें कि हमें विद्यावान का आशीर्वाद प्रदान करें। पंडित से शास्त्री जी ने श्रीमद् भागवत कथा में राजा परीक्षित ने अपने गुरुजी सुखदेव मुनि से सहज मुक्ति का उपाय तथा सृष्टि की का उत्पत्ति का पूछा सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को विस्तार से सहज मुक्ति और सस्ती की उत्पत्ति के बारे में बताया।
शास्त्री जी ने कहा कि भागवत जी में ब्रह्मा जी के पांच मुख और शिव पुराण में चार मुख बताए गए ब्रह्मा जी के पांच मुख्य थे पर उन्होंने पृथ्वी का छोड़ देखने की छोटी बात महादेव जी को बताने तो महादेव जी के कहने पर भैरव जी ने उनका एक मुख कम कर दिया ऐसे में ब्रह्मा जी के चार मुख हैं और उनके झूठ बोलने पर ब्रह्मा जी की केवल पुष्कर और यज्ञ के शुरुआत में उनकी पूजा कि जाती है।
शास्त्री जी ने कहा कि जिसे भगवान ने अपना लिया उसके जीवन की नैया पार लग जाती है और जिसको मेरे राम ने एक छोड़ दिया वह डूब जाता है। रावण दिखावा करता था।जो आडंबर दिखावे में जीता है वह ज्यादा नहीं टिकता है। रावण शिव का भक्त था और राम का नाम भी लेता था उसने एक दिन अपना दिखावा करते हुए पत्थर तैराने के लिए समुद्र के किनारे गया और अपना नाम पत्थर पर लिखकर पत्थर तेरा ना चाहा पर नहीं तेरा फिर उसने अपना नाम रावण लिखकर पत्थर को राम नाम का मंत्र दिया तो पत्थर तैर गया।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि जीवन में कभी दुखी नहीं होना चाहिए एक दिया जब हम आशा का जला देते हैं तो सारा अंधियारा मिट जाता है। ऐसे ही प्रयास करने से जीवन अच्छा बन जाता है।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि जो निंदा करते हैं उनके ऊपर कई पापियों का भार रहता है, निंदा करने वाले का हमें विरोध नहीं करना चाहिए जो है जिंदा उसी की होती है निंदा। शास्त्री जी ने कहा कि मां अपने बच्चों की गंदगी हाथ से और निंदक जबान से सफाई करते हैं। जीवन में सकारात्मक बने अच्छी सोच होगी तो अच्छा दिखेगा और अच्छा दिखेगा तो जीवन में सब कुछ अच्छा ही होगा।
शास्त्री जी ने कहा कि ब्रह्मा जी ने तप कर सृष्टि की रचना प्रारंभ की तो सबसे पहले थॉमस नाम का रक्षा उत्पन्न हुआ। ऐसे ही हम जब कोई अच्छा कार्य करते हैं तो रुकावटें सबसे पहले आती है पर इससे विचलित न होकर आगे बढ़ता है उसे ही मंजिल मिलती है।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि नेक भक्ति के रास्ते पर चलते रहो ,सादगी भी एक भक्त हैं और जीवन सादगी से जिए जो प्राप्त है वह पर्याप्त हैं और जिनके मन मस्त है उसके पास समस्त हैं।

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