एनडीपीएस का वारंट होने की बात बोलकर निर्दोष मजदूर को ले जा रही थी प्रतापगढ़ पुलिस,कांग्रेस नेता जोकचन्द्र के विरोध के बाद छोड़ना पड़ा मजदूर को

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पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। एनडीपीएस प्रकरण में गांव काचरिया चन्द्रावत के निर्दोष मजदूर को पकड़कर ले गई प्रतापगढ़ व पिपलिया चौकी पुलिस को कांग्रेस नेता श्यामलाल जोकचन्द्र के विरोध के बाद छोड़ना पड़ा। जानकारी के अनुसार राजस्थान की प्रतापगढ पुलिस के 5 जवान के साथ पिपलिया चोकी पुलिस को लेकर 31 अगस्त को शाम 7 बजे गांव काचरिया चन्द्रावत में आई और मोहनलाल पिता भंवरलाल बलाई को ले गई। पुलिस ने मोहनलाल के परिजनों को पूछताछ कर छोड़ने का भरोसा दिया। लेकिन रात्रि 12 बजे तक वापस नही छोड़ा। परिजनों की सूचना गांव के निवासी, मल्हारगढ़ विस से पूर्व कांग्रेस प्रत्याक्षी श्यामलाल जोकचन्द्र ने पहले टीआई नीरज सरवान से मोबाइल पर चर्चा की व कहा कि जिस व्यक्ति को पुलिस ले गई है वह निर्दोष है, उसे छोड़ा जाए, लेकिन पुलिस ने उसे नही छोड़ा व राजस्थान पुलिस का वारंट होने पर उसे ले जाने की बात कही तो रात्रि 1 बजे करीब कांग्रेस नेता जोकचन्द्र कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस चोकी पहंुच गए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने टीआई नीरज सरवान से इस संबंध में चर्चा कर मोहनलाल बलाई को छोडने की कहा, जोकचन्द्र ने बताया कि मोहनलाल बलाई कृषि उपज मंडी में मजदूर है, उसका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नही है। टीआई का कहना था राजस्थान की प्रतापगढ़ पुलिस आरोपी को 8 सितम्बर 1989 के प्रकरण में वारंट होने पर लेने आई है। जोकचन्द्र ने जब मोहनलाल को ले जाने संबंधी दस्तावेज मांगे तो प्रतापगढ़ पुलिस के पास दस्तावेज ही नही थे। वहीं पुलिस रिकार्ड में एनडीपीएस एक्ट प्रकरण में जो आरोपी है उसका पता काचरिया चन्द्रावत निवासी मोहनलाल पिता भंवरदास रैदास लिखा हुआ था। इस तरह जिस व्यक्ति को पुलिस पकड़कर लेकर आई थी वह मोहनलाल पिता भंवरलाल बलाई है, उसकी जाति भी अलग थी, वर्तमान में मोहनलाल बलाई की उम्र मात्र 46 वर्ष है। जबकि पुलिस ने प्रकरण 1989 का बता रही है, एसे में पुलिस ने क्या 12 वर्ष की आयु में ही मोहनलाल का केस बना दिया था ? वहीं जिस आरोपी का नाम बताया है उस नाम का व्यक्ति गांव में है ही नही। पुलिस कार्रवाई के विरोध में जोकचन्द्र करीब आधे घंटे तक थाने में रुके। काफी देर तक बहस के बाद मजूदर को छोड़ा और प्रतापगढ पुलिस को बैरंग लौटना पड़ा।
लगातार पुलिस कर रही फर्जी कार्रवाई:-
कांग्रेस नेता जोकचन्द्र ने आरोप लगाया कि लगातार क्षेत्र में पुलिस एनडीपीएस एक्ट के नाम से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, गरीबों को फसाने का षड्यंत्र रच रही है। वारंट में मुख्य तस्करों व अपराधियों को बचाने के उद्देश्य से किसानों, गरीबों, मजदूरों को फर्जी फसाने का कार्य हो रहा है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट प्रकरणों को कमाई का जरीया बना लिया है, मंदसौर जिले की पुलिस अन्य अपराधों को रोकने के बजाए केवल एनडीपीएस के फर्जी प्रकरण बनाने में लगी हुई है। कुछ दिनों पूर्व भी मंदसौर जिले के 11 पुलिस अधिकारियों व कर्मियों पर उत्तरप्रदेश की आगरा पुलिस ने अपहरण का प्रकरण दर्ज किया है। मंदसौर पुलिस ने आगरा से व्यक्ति को लाकर मंदसौर में फर्जी एनडीपीएस का प्रकरण बना दिया था, जिसके दस्तावेज पेश करने के बाद पुलिस पर यह कार्रवाई हुई है, लेकिन खास बात यह है कि प्रकरण दर्ज होने के बाद भी यह सभी थानों पर तैनात है और फर्जी कार्रवाई करने में लगे हुए है। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस व सरकार का गठजोड किसानों, मजदूरों, गरीबों, व्यापारियों पर फर्जी प्रकरण बनाने में लगे हुए है और उनसे करोड़ों की वसूलियां हो रही है।
कोई खास बात नही:- इस संबंध में टीआई नीरज सरवान का कहना है मोहनलाल के नाम से वारंट था, जिसे राजस्थान की पुलिस लाई थी, लेकिन जाति व उम्र में भिन्नता होने के बाद तस्दीक कर उसे छोड़ दिया है। जिले में वारंटियों को पकड़ने की मुहिम चलाई जा रही है। एसे में मोहनलाल को पकड़कर लाने के बाद छोड़ दिया है, इसमें कोई खास बात नही है।
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