एरिया थाना गरोठ निवासी महेंद्र की हत्या उसी की बहन ने करवाई थी , चित्तौड़ जिले गंगरार कस्बे में कुए में मिली लाश की हत्या का खुलासा

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दृश्यम फ़िल्म की तर्ज पर दिया घटना को अंजाम
चित्तौड़गढ़ : गंगरार कस्बे में 5 दिसम्बर को हनुमान मन्दिर के पीछे की तरफ, किले के नीचे, पहाडी के ढलान में करीब 150-200 फीट नीचे कुए में अज्ञात व्यक्ति की हत्या कर बिना सिर का धड़ मिलने व दूसरे ही दिन उसका सिर भी मिलने पर सोशल मिडीया के माध्यम से उक्त अज्ञात मृतक की शिनाख्त मध्यप्रदेश के महेंद्र रायका के रुप में हुई थी। मृतक महेंद्र ग्राम एरिया पुलिस थाना गरोठ जिला मन्दसौर का निवासी था और गंगरार थाना अंतर्गत भाटखेडा़ निवासी शान्तिलाल रायका का भानेज था और भाटखेडा़ ही रह रहा था। मृतक महेंद्र की बहन ने ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर सगे भाई की हत्या करवा दी। मृतक उसकी बहन की शादी अपनी बिरादरी में करवाना चाहता था, जबकि आरोपी बहिन अपनी पसंद से प्रेमी के साथ जाना चाहती थी। गौरतलब यह भी की आरोपियों ने दृश्यम फ़िल्म देखकर हत्या करने का षड्यंत्र रचा।
मृतक महेन्द्र के ननिहाल के गांव भाटखेडा जहां मृतक की माँ आजोदिया बाई व उसकी बहीन तनू उर्फ तनिष्का दो साल से रह रही है। जहां पर आरोपी महावीर धोबी निवासी गंगरार का उनके घर पर आना जाना है तथा मृतका की बहिन तनू उर्फ तनिष्का से आरोपी महावीर धोबी के प्रेम सम्बन्ध है। जिस पर आरोपी महावीर धोबी की गतिविधीयों पर नजर रख गम्भीरता से जांच-पडताल की गई तथा तकनिकी रूप से जांच की गई। जांच से आरोपी महावीर धोबी की गतिविधीया संदिग्ध पाई जाने से आरोपी महावीर धोबी को शुक्रवार को शाम के समय गणेश घाटी के पास पहाडी से पकड़कर पुछताछ की गई तो आरोपी महावीर धोबी ने मृतक महेन्द्र रायका की बहिन तनु उर्फ तनिष्का से आपराधिक षड़यंत्र रचकर अपने अन्य साथी कस्बा गंगरार निवासी 20 वर्षीय महेन्द्र पुत्र पन्नालाल धोबी व एक अन्य बाल अपचारी के साथ मिलकर मृतक महेन्द्र रायका की हत्या करना कबुल किया तथा मृतक महेन्द्र रायका की बहन 19 वर्षीय तनू उर्फ तनिष्का पुत्री गोविन्द रायका निवासी एरिया पुलिस थाना गरोठ जिला मन्दसौर हाल निवासी ननिहाल भाटखेडा पुलिस थाना गंगरार जिला चितौडगढ को शनिवार को उसके घर भाटखेडा से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी महावीर धोबी ने बताया की मेरी जान पहचान भाटखेडा में रहने वाली तनू रायका से आज से करीब 3 साल पहले हुई थी। वह अपनी मॉ व छोटी बहिन एवं भाई के साथ भाटखेडा में रहती थी। मैं व तनू दोनो मोबाइल फोन पर बाते करने लग गये। मेरे व तनू रायका दोनो के बीच अवैध सम्बन्ध हो गये। आज से करीब दो साल पहले तनू ने उसकी छोटी बहिन से मेरे राखी बांधकर कर धर्म का भाई बनाया। उसके बाद मैं तनू के घर आने जाने लग गया। मेरे द्वारा तनू को घुमाने फिराने व काम से लेकर जाने एवं हमारे आपस में बातचीत करने की जानकारी उसके भाई महैन्द्र को पता चली तो वह मुझे घर पर नही आने व बातचीत करने के लिए मना करने लगा। उसके बाद तनू से मेने 40 हजार रूपये उधार लिए थे। जिसकी जानकारी उसके भाई महेन्द्र को चल गई और वह बहन के पैसो की मांग करने लग गया। इसी दौरान महैन्द्र व उसकी बहिन तनू की सगाई आटे-साटे में उज्जेन की तरफ हो गई।
तनू ने महावीर को बताया की वह उज्जैन में शादी नही करना चाहती है और महावीर से शादी करना चाहती है। पहले तो तनू ने उसकी मॉ को शादी बाद में करने के लिए बोला लेकिन 11 नवंबर को तनू का भाई घर पर आया तो शादी जल्दी करने की जिद करने लगा। तनू ने महावीर को बताया की मेरे व मेरे भाई महेन्द्र की फरवरी में शादी करने वाले है। जिस पर महावीर व तनू ने प्लान बनाया की महेन्द्र आये दिन पेसो की भी मांग करता है और शादी की भी जिद कर रहा है। इसको रास्ते से हटा देते है जो न ही तो पेसे देने पडेंगे और न ही शादी होगी। इसके बाद दोनो आपस में मिलते रहेगे।
महावीर व तनू ने ही महेन्द्र रायका को मारने व बीच से हटाने का प्लान किया एवं प्लान के अनुसार महावीर व उसके अन्य साथियो के साथ मिलकर 16 नवम्बर को महेन्द्र रायका की हत्या कर दी। अन्य आरोपी महेंद्र धोबी ने पुछताछ पर बताया की हमने यह घटना दृश्यम फिल्म को देखकर प्लान बना कर की थी।
11 नवम्बर को मृतक महेन्द्र रायका जो मन्दसौर में होटल ढाबो पर काम करता था जो अपने घर ननिहाल आया था। दुसरे दिन महेन्द्र रायका की बहिन तनू व छोटी बहिन को बुआ जी के घर जन्मदिन पार्टी में कोटा जाना था। जिनको महावीर धोबी अपनी वैन में बिठाकर चितौडगढ तक छोडकर आया था। उस दिनांक मृतक महेंद्र रायका की बहिन तनू ने आरोपी महेन्द्र धोबी को बोला था कि महेन्द्र घर आ गया है, हम कोटा से वापस आयेगे उस दिन महेन्द्र को मारना है। 16 नवम्बर को तनू व उसकी बहिन दोनो कोटा से घर आ रही थी। जहां प्लान अनुसार तनू द्वारा अपने भाई महेन्द्र रायका को मोबाईल फोन करके बोला कि मैं आ रही हॅू, तु महावीर धोबी की मोटरसाईकिल लेकर हमे लेने गंगरार चौराहे पर आ जाना। जिस पर महेन्द्र रायका घर से दिन के समय पैदल ही गंगरार के लिए रवाना हो गया। तनू द्वारा भाई महेन्द्र की लोकेशन महावीर धोबी को बताई तो, महावीर धोबी स्वयं की वैन लेकर भाटखेडा की तरफ गया और जहां रास्ते में ही महेन्द्र रायका को बिठाकर ले आया। महावीर धोबी द्वारा महैन्द्र रायका को लेकर गंगरार किले पर हनुमान जी के मन्दिर के पास चला गया और वहां महावीर धोबी ने अपने साथी महेन्द्र धोबी व अन्य साथी बाल अपचारी को बुलाया और अपने दोनो साथियो के साथ मिलकर महेन्द्र रायका की हत्या करने की योजना बनाई। किले पर बैठकर सभी ने गांजा पिया। वैन में बैठाकर शारणेश्वर महादेव मन्दिर से आगे सुनसान जगह पर ले जाकर अंधेरा होने के बाद तीनो ने मिलकर गमछा (तोलिया) से महैन्द्र रेबारी रायका का गला घोट दिया तथा लाश को ठिकाने लगाने के लिए बिजली के वायर से हाथ व पैर बांध दिये। हत्या करने के बाद रात करीब 10-11 बजे लाश को किले पर ले जाकर, किले पिछे स्थित कुए में डाल दिया और अपने अपने घर चले गए।
प्लान के अनुसार पुलिस पकड से बचने व पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक महेन्द्र रायका का मोबाईल फोन को बन्द कर दिया और 5 दिन बाद 21 नवम्बर को महावीर धोबी द्वारा स्वयं के मोबाईल को गंगरार में ही रख कर मृतक महेन्द्र रायका के मोबाईल को लेकर रेल्वे स्टेशन चितौडगढ से ट्रेन में बैठकर मन्दसौर पहुंचा। मन्दसौर रेल्वे स्टेशन उतर कर मन्दसोर में महाराणा प्रताप सर्किल के पास मोबाईल को चालू किया व चालू करने के बाद योजना अनुसार तनू ने महेन्द्र रायका के फोन पर कॉल किया जिसको महावीर धोबी ने कॉल उठाया। वहां से फोन को रोड के किनारे पर डालकर महावीर धोबी पुनः ट्रेन में बैठकर गंगरार आ गया। तनू ने अपनी मॉ व छोटी बहिन को गुमराह करने के बोला कि 21 नवम्बर को मेरी भाई महेन्द्र से बात हुई है व मन्दसौर की तरफ गाडी पर है जबकि आरापियों ने मृतक की बहिन तनू के साथ मिलकर आपराधिक षड़यंत्र रचकर 16 नवम्बर को ही महेन्द्र की हत्या कर दी थी।
हत्यारे महावीर के साथी महेंद्र धोबी पर पुलिस को उसी दिन शंका हो गई थी जब गंगरार पुलिस द्वारा 5 दिसंबर कुए से लाश को बाहर निकालने के दौरान आरोपी महेन्द्र धोबी पुलिस की गतिविधियो पर नजर रखने और पुलिस की सहानुभुति लेने के लिए मृतक की लाश का कुए से बाहर निकालने व लाश को फिनाईल से साफ करने में जान बुझ कर आगे आकर पुर्ण सहयोग कर रहा था। जब पुलिस द्वारा मृतक महेन्द्र रायका के हाथ पर कुछ लिखा हुआ है या नही यह जानने के लिए मृतक का हाथ फिनाईल से साफ कर लाईट के उजाले से देख रहे थे तो पुलिस को मृतक के हाथ पर कमलेश रायका जैसा लिखा हुआ दिखाई देने से नाम बोला तो उस समय वहां मौजूद आरोपी महेन्द्र धोबी ने एकदम बोला की इस के हाथ पर लिखा हुआ नाम महेन्द्र रायका है।