बचपन से ही सच्चाई पर अडिग रहने वाले बाल गंगाधर तिलक हुए लोकमान्य तिलक -आदर्श शिक्षिका श्रीमती सिसोदिया

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नाहरगढ,। शासकीय माध्यमिक स्कूल गरनाई (संजीत) लोकमान्य गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि मनाई गई।
इस अवसर पर आदर्श शिक्षिका श्रीमती ललिता सिसोदिया तथा छात्र छात्राओं व स्टाफ ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
तत्पश्चात प्राचार्य श्रीमती ललिता सिसोदिया बच्चों को वक्तव्य रखते हुए कहा कि बचपन से ही सच्चाई पर अडिग रहते थे, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक,देश की आजादी में कई लोगों ने अपनी पूरी जान लगा दी, हालांकि, कुछ ऐसे थे जिन्होंने आजादी की चिंगारी जन तक पहुंचाया और एक आजाद भारत का सपना दिखाया। उन्हीं में से एक थे बाल गंगाधर तिलक। अंग्रेजों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने वालों में तिलक का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है। तिलक ने अपना सारा जीवन समाज की कुरीतियों को दुर करने और जागरुकता फैलाने में लगा दिया। जानकारी के लिए बता दें कि तिलक का प्रारंभिक नाम केशव गंगाधर था। बाद में उन्हें लोकमान्य तिलक के नाम से बुलाया जाने लगा। बाल गंगाधर तिलक जिनका नाम लेने में आज भी गर्व होता है। यह आधुनिक भारत के प्रमुख वास्तुकार थे, उन्होंने भारत के संघर्ष के दौरान एक क्रांतिकारी के रूप में कार्य किया, उनके समर्थकों ने सम्मानित करने के लिए लोकमान्य का खिताब दिया वह एक महान विद्वान थे, जिनका मानना था की आजादी एक राष्ट्र कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान स्कूल स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।