भगवान श्री कृष्ण के जन्मवृतांत को श्रवण कर भाव विभोर हुए धर्मालुजन

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मंदसौर। नरसिंहपुरा स्थिम कुमावत धर्माशाला में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। भागवत कथा प्रवक्ता पं श्री भीमाशंकर शर्मा धारियाखेडी वाले प्रतिदिन दोपहर 12.15 बजे से 4.30 बजे तक धर्मालुजन को व्यासपीठ से श्रीमद भागवत श्रवण करा है। कुमावत समाज की गरिमामय उपस्थिति में अडानिया परिवार के द्वारा आयोजित इस श्रीमद भागवत कथा को श्रवण करने हजारो की संख्या में धर्मालुजन नरसिहपुरा कुमावत धर्माशाला पहुच रहे है।
श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस रविवार को पं भीमाशंकर जी ने भागवत कथ श्रीकृष्ण का जन्मवृतान्त श्रवण कराया। उनके मुखारविन्द से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मवृतान्त श्रवण कर धर्मालुजन भाव विभोर हो गये। कथा में
उपस्थित धर्मालुजनो ने श्रीकृष्ण के जन्म वाचन पर मर्यादित रूप से नृत्य भी किया और अपने भावो को प्रकटीकरण किया। अडानिया परिवार ने कृष्ण जन्म वाचन पर अपनी प्रसन्नता की अभिव्यक्ति हेतु कथा पाण्डाल में प्रसादी का
वितरण भी किया।
पं श्री भीमाशंकरजी ने कह कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पूर्व भारतवर्ष की स्थिति विकट थी। मथुरा नरेश कंस व पं मगध नरेश जरासंघ ने पुरे आर्यवृत्त में आंतक गया रखा था। ब्राहमणो ऋषि मुनियो, स्त्रियो का जीवन बिलकुल सुरक्षित नही था। कंस व जरासंघ जैसे अत्याचारी शासको से प्रजा दुखी थी। ऐसे विकट समय में कृष्ण की माता देवकी व वासुदेवजी के यहां जन्म हुआ। उनके जन्म के पूर्व कंस ने अपनी बहन देवकी के सात पुत्रीयो को कंस
ने मथुरा के बंद्रीग्रह जेल में मार दिया। कंस ने अपने पिता उग्रसेनजी को भी बंदी बनाकर काराग्रह में डाल दिया था और उनकी जगह राजपाठ करने लगा।
जरासंघ का समर्थन पाकर कंसा के अत्याचार और बढ गये । ऐसे विकट समय में कृष्ण ने भादो मास की अष्टमी को पृथ्वी पर अवतार लेकर पृथ्वीवासियो को संबल प्रदान किया।
कर्ण की भांति महादानी बनो- पं भीमाशंकरजी ने कहा कि हमारे घर द्वार पर कोई भी मांगने उसे खाली हाथ नही लोटाना चाहिए अपनी क्षमता अनुसार दान जरूर देना चाहिए। कर्ण को पुरा संसार महादानी कहता है क्यो कि कर्ण अपने द्वार पर आये। व्यक्ति को कभी खाली हाथ नही लौटाता था। जो भी याचक मांगता था उसे वह जरूर देता था। कृष्ण ने भी कर्ण की परीक्षा ली थीं हमें कर्ण से अपने जीवन में प्रेरणा लेनी चाहिए।
धन को नही धर्म का महत्व दो- पं शर्मा ने कहा कि इस पृथ्वी पर रहकर हम जितना कमायेगे उतना सब यही रह जाना है। जमीन जायदाद, सोना चांदी घर परिवार कोई साथ नही जायेगा। यदि साथ जायेगा तो धर्म जायेगा। इसलिये धन को नही धर्म को महत्व दो।
पाप का फल भोगना ही पडता है- आपने कहा कि हम जो पाप करते है उसका फल हमें भोगना ही । भीष्म पीतामाह ने अपने पूर्व जन्म मे तितली को काटे चुभाये थे 72 वे जन्म में उनका पाप उदय मे आया तो महाभारत के युद्ध में
उन्हे बाणो की शेश्या मिली। इन्होने की पौथी की आरती- श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस अडानिया परिवार
के गेंदमल अडानिया, सत्यनारायण अडानिया, अर्जुन अडानिया, कोमल अडानिया, जितेन्द्र अडानिया, विजय अडानिया, चिरांग अडानिया, धर्मेन्द्र अडानिया, कांजी पटेल, विनय दुबेला आदि ने भागवत पौथी की आरती की।