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श्री प्रेमप्रकाश पंथ का आधार सनातन धर्म है-संत शम्भूलाल

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मन्दसौर। प्रेमप्रकाश सेवा मण्डली के अध्यक्ष पुरूषोत्तम शिवानी ने बताया कि पवित्र पावन श्रावण (पुरूषोत्तम) मास संयोग से तृतीय सोमवार एवं आचार्य सतगुरू स्वामी टेऊँरामजी महाराज का मासिक अवतार तिथि चौथ महोत्सव पर सिन्धी हिन्दू समाज की प्रमुख धर्मपीठ की मंदसौर शाखा श्री प्रेमप्रकाश आश्रम में संत श्री शंभूलाल प्रेमप्रकाशी ने अपने मुखारविंद से अमृतमयी वर्खा में कहा कि श्री प्रेमप्रकाश पंथ का आधार धरातल ‘‘सनातन धर्म’’ है। पंथ के सतगुरूओं की उपासना के साथ -साथ देवी देवताओं की उपासना पूजा अर्चना एवं पर्व पूर्ण श्रद्धा उत्साह व समर्पण भावना के साथ मनाये जाते है। मनुष्य मानव का जीवन परमात्मा के बिना व्यर्थ है और धर्म के आधार पर चलने से आप भक्ति मार्ग पर चल सकते है।
सन्त श्री शम्भूलालजी प्रेमप्रकाशी ने कहा कि मनुष्य को हर दिन सुबह उठकर भगवान का धन्यवाद करना चाहिये व आज का दिन एवं जीवन के प्रतिदिन को एक अवसर मानकर पाप कर्म से बचना चाहिये। अगर आप पापकर्म से बचोगे तो आपका मन आत्मा धर्म मार्ग पर और सत्संग में लगेगा, उससे ही आपके आत्म शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।
आपश्री ने कहा कि आप कितने अधिक या कम वर्ष जीते है यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आपने अपने जीवन में कर्म कैसे किये है। संत श्री ने आचार्य सतगुरू स्वामी टेऊँरामजी महाराज के जीवन की सोलह शिक्षाओं में एक शिक्षा-
‘‘समय जोई गुजर जावे, याद ना तुम ताहिं कर।
आने वाले वक्त की भी, चिन्ता मन में नाहिं कर।।
की सविस्तार व्याख्या कर उपस्थित संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगत का आभार प्रदर्शन सुरेश बाबानी एवं दयाराम जैसवानी ने प्रकट किया।

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