दुआ के लिए उठे हजारों हाथ, एक साथ खुदा की बारगाह में शीश झुकाया

“ईद उल फितर” का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
साबिर पटेल
सीतामऊ। मुस्लिम समाज में पवित्र रमजान माह के 30 रोज़े समाप्त होने पर उत्साह के साथ मनाया “ईद उल फितर” का पर्व।
ईद की मुख्य नमाज शहर काजी इफ्तेखारुल्लाह शेख के द्वारा ईदगाह में अदा करवाई गई। हजारों की संख्या में सीतामऊ नगर एवं आसपास के मुस्लिम समाजजनों ने खुदा की बारगाह में सर झुकाया।
नमाज के बाद दुआ के लिए उठे हजारों हाथों ने देश में अमन चैन खुशहाली आपसी भाईचारा व एकता के लिए दुआएं मांगी। साथ ही रोजेदारों ने जो तीस दिन तक भूखे प्यासे रहकर खुदा की इबादत की है उसे कबूल करने की इल्तज़ा खुदा की बारगाह में की। तत्पश्चात समाज जनों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
नमाज के बाद दिए संयुक्त वक्तव्य में शहर काजी इफ्तेखारुल्लाह शेख व अंजुमन सदर शमशेर मौलाना ने समस्त देशवासियों एवं नगर वासियों को ईद की शुभकामनाएं दी।
ईद के मुख्य समारोह में अच्छी व्यवस्था के लिए राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन, नगर पंचायत आदि का शुक्रिया अदा किया।
ईदगाह में राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों कांग्रेस नेता भुवनेश्वर सिंह दीपाखेड़ा, रमेश मालवीया, रामेश्वर जामलिया, पवन शर्मा, दिनेश सेठिया, भाजपा नेता अनिल पांडेय ने भी पहुंचकर मुस्लिम समाज जनों को ईद की मुबारकबाद दी। ईदगाह में प्रशासन की तरफ से एसडीएम शिवानी गर्ग, एसडीओपी दिनेश प्रजापति, थाना प्रभारी मोहन मालवीय, तहसीलदार शुभम पाटीदार, पटवारी समरथ बैरागी आदि ने पहुंच कर मुस्लिम समाज को ईद की बधाई दी।
ईदगाह परिसर में फुटकर व्यवसाययों द्वारा हाथ ठेले पर आइसक्रीम, कचोरी, समोसे, पानी पतासे, पापड़, आदि की दुकान लगाई गई थी जिनका लुत्फ बच्चों के साथ-साथ बढ़ो ने भी उठाया। ईदगाह परिसर में धार्मिक मेले सा नजारा दिखाई दिया।
इसके बाद पूर्व के परंपरा अनुसार ईदगाह से चल समारोह (जुलूस) बैंड बाजे के साथ प्रारंभ हुआ। जुलूस में शामिल समाजजन सभी नगर वासियों से मिलकर ईद की मुबारकबाद दे रहे थे। इस दौरान सांप्रदायिक सौहार्द के नजारे भी दिखाई दिए सभी हिंदू मुस्लिम भाइयों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।जुलूस में घोड़े पर सवार काजी साहब नगर वासियों का अभिनंदन स्वीकार करते हुए चल रहे थे चल समारोह मुख्य बाजार से होकर नगर पंचायत पहुंचा और वापसी में तालाब चौक पर क़ाज़ीवाडा मस्जिद पहुंचकर समापन हुआ। उसके बाद समाज जन ने एक दूसरे के घर जाकर मीठी सेवइयों का लुत्फ उठाया।