आलेख/ विचारमध्यप्रदेशहोशंगाबाद

धन्नाराम पर समाज सेवा की धुन सवार हो गई………….

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कहानी बदलाव की—

धन्नाराम पर समाज सेवा की धुन सवार हो गई………….

 धन्नाराम जी नायक

– संस्थापक उरमूल खेजड़ी संस्थान

 

वंचित व मजदूर वर्ग के लिए बदलाव के नायक बने धन्नाराम – 5 वर्षों में 960 ग्रामस्तरीय केम्प, 11400 लोगों के मोतियाबिंद की पहचान कर 6200 मरीजों के सर्जरी करवाई

राजस्थान नागौर जिला ब्लॉक जायल के ग्राम झाड़ेली के धन्नाराम नायक बदलाव का नायक बनकर सैकड़ों लोगों को शिक्षा व जागरूकता के साथ स्वावलम्बी बना चुके हैं।

पढ़ाई के दिनों में नेहरू युवा केन्द्र से जुड़ने पर इनकी सोच ने बदलाव ला दिया। 37 वर्ष पहले अनुसूचित जाति वर्ग का युवा विज्ञान संकाय से सीनियर सैकण्डरी उत्तीर्ण करने के बाद चाहते तो अच्छी सरकारी नौकरी पा सकते थे, लेकिन नेहरू युवा केन्द्र के साथ जुड़ाव के बाद सामाजिक सरोकार के कार्यों में मन लग चुका था।

सैंकड़ों लोगों को बना चुके हैं स्वावलम्बी

1988 में नेहरू युवा केन्द्र के साथ जुड़े धन्नाराम पर समाज सेवा की धुन सवार हो गई। नायक बताते हैं कि उन दिनों तिलोनिया में स्वयंसेवी संस्थान के माध्यम से कमजोर व मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए कार्यरत अनिता भारतीय व खेमराज चौधरी के साथ काम करने पर वंचित वर्ग को स्वावलम्बी बनाने का प्रयास शुरू किया। उरमूल ग्रामीण स्वास्थ्य शोध एवं विकास न्यास के संजय घोष की प्रेरणा से 1993 में जायल क्षेत्र में कार्य करने के लिए उरमूल खेजड़ी संस्थान की स्थापना की गई।

30 वर्ष से मिशन जारी

वंचित व मजदूर वर्ग के जीवन में आर्थिक, सामाजिक स्तर में सुधार लाने के लिए गठित स्वयं सेवी संगठन ने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। योजनाओं का धरातल पर प्रचार- प्रसार करते हुए विभिन्न स्वयंसेवी संगठन,एनजीओ व सरकारी सहयोग से गत 30 वर्षों में जायल के 30 व मूण्डवा के 50 गांवों में जल स्रोतों का संरक्षण एवं जल प्रबन्धन कार्य, वंचित बालक बालिकाओं का शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ाव, युवाओं के साथ कौशल विकास कार्य, महिला सशक्तिकरण एवं उनकी आजीविका के लिए कार्य,किये नागौर जिले के 6 ब्लॉक में प्रवासी एवं गैर प्रवासी श्रमिकों के हितार्थ कार्य करके बंधुआ मुक्ति व पुनर्वास, जिले भर में नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गत 5 वर्षों में 960 ग्रामस्तरीय केम्प, 11400 लोगों के मोतियाबिंद की पहचान कर 6200 मरीजों के सर्जरी करवाई गई है। इसी प्रकार दिव्यांग, सिलिकोसिस बचाव कार्यक्रम, पोषण एवं राहत कार्यक्रम के माध्यम से वंचित व मजदूर वर्ग के लोगों को जागरूक कर सरकारी विकास योजनाओं से जोड़कर सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं।

 

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