मैं श्रेष्ठ हूं, अच्छी बात है, परंतु मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं ,यह भ्रम है -पंडित श्री पुरोहित

वेदव्यास जी महाराज के द्वारा 18 पुराणों का निर्माण किया गया है ,जिन्हें सनातन धर्म के समस्त संत महात्मा एवं सनातन धर्म के धर्म ध्वजा ,चारों शंकराचार्य जी महाराज सत्य एवं सार्थक बताते हैं, तथा इन्हीं 18 पुराणों में से किसी भी एक पुराण का अनुसरण कर लेना ही जीव के उद्धार का कारण भी बन सकता है, जिस प्रकार से वृक्ष की कई शाखाएं, कई पत्ते ,और कई फल और फूल होते हैं, परंतु वृक्ष की जड़ एक ही होती है, ठीक उसी प्रकार इस कलयुग में समय-समय पर अनेक प्रकार के पंथ उत्पन्न हो जाते हैं ,और अपने आप को ही सर्वश्रेष्ठ मानने लगते हैं, जो कि उनका एक बहुत बड़ा भ्रम है ,सनातन धर्म के अनुयायियों को झूठा और बकवास बताते हुए अपने आप को ही श्रेष्ठ बताना ऐसे व्यक्तियों की पहचान होती है, ऐसे व्यक्तियों से बचने की आवश्यकता होती है ,भगवान श्री कृष्ण प्रत्येक वृक्ष की जड़ है, और हमें जड़ को पकड़ना चाहिए न की शाखाएं, वृक्ष ,और फल, पुष्पा को, श्री कृष्ण भागवत स्वरूप है, इसलिए भागवत का ही अनुसरण करना चाहि।
आज कथा में विशेष रुप से जिला पंचायत सदस्य श्याम सिंह चौहान चिकन्या एवं पिपलिया मिठाचा के नवनिर्वाचित सरपंच श्री श्याम सिंह जी विशेष रूप से उपस्थित रहे
उक्त उद्गार पंडित श्री विक्रम पुरोहित (श्री सुदामा जी) द्वारा भानपुरा तहसील के ग्राम भीम पूरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस को कही गई ,पंचम दिवस की कथा में भगवान की बाल लीलाओं का सजीव प्रस्तुतीकरण एवं भगवान गोवर्धन की बड़ी सुंदर सी झांकी का दर्शन कराया गया ,मधुर मधुर भजनों के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण को रिझाया गया एवं सभी ग्रामीण वासियों ने कथा का आनंद लाभ प्राप्त किया/ कल होगा कृष्ण और मनी का विवाह जिसे देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग लाल ही थे कल कन्यादान में आने वाली समस्त दान राशि भीमपुरा में चल रहे हनुमान जी मंदिर के निर्माण में लगाई जाएगी