श्री जांगड़ा पोरवाल समाज महिला मंडल मंदसौर ने एक दिवसीय संजा उत्सव का आयोजन किया

संजा का पर्व कुंवारी कन्याओं का अनुष्ठानिक व्रत
मन्दसौर। चाल वो संजा गोटन खेलवाने चाला, संजा बई का लाडा़जी,आमली का झाड़ नीचे रिमझिम बाजा बाजे जी, संजा के सासरे जावांगा जावांगा जैसे संजा के मालवी लोकगीत सोलह श्राद्ध के दिनों में हर गांव, कस्बे व नगर में सुनाई देते थे। आधुनिकरण के इस दौर में यह संस्कृति विलुप्त सी हो गई है।
हमारी इसी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने व नई पीढी को इस विरासत से अवगत करवाने के उद्देश्य से श्री जांगड़ा पोरवाल समाज महिला मंडल मंदसौर ने एक दिवसीय संजा उत्सव का आयोजन रखा ।
समाज की महिलाओं व बच्चों ने मिलकर गाय के गोबर से पुनम-पाटला, एकम-पंखा, बीज-बीजोड़ा, तीज-घेवर, चौथ-चोपड़, पंचमी-कुंवारा-कुंवारीं,छ ठ-छाबड़ी, सप्तमी-स्वास्तिक, अष्टमी- अष्ट पंखुड़ी फुल, नवमी-नौ ढोंकरे-ढोंकरी, दसम -बंदरवार, ग्यारस- केले का पेड़ व बारस का किला कोट बनाकर संजा को फुल,पत्ते व रंग बिरंगी पन्नीयो से सजाया गया।
इस अवसर पर अध्यक्ष कुसुम सेठिया ने कहा कि संजा का यह पर्व कुंवारी कन्याओं का अनुष्ठानिक व्रत है जो बालिकाएं बड़ी उम्मीद व उमंग के साथ मनाती हैं। मालवा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि संजा पर्व निमाड़ व राजस्थान की संस्कृति में भी रचा बसा है। संजा सिर्फ लोक परम्परा का ही पर्व नहीं इसमें विवाहित महिलाओं का जीवन भी झलकता है, तभी तो बालिकाएं विवाह पश्चात ससुराल से मायके आकर इस व्रत का उद्यापन करती हैं।
मिडिया प्रभारी प्रिया फरक्या ने बताया कि सोलह संजा बनाने के पश्चात उपस्थित महिलाओं ने संजा के पारंपरिक गीतों के साथ आधुनिक गीतों की भी प्रस्तुत इस अवसर पर दी।अंत में संजा की आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर मार्गदर्शन मंडल निर्मला मांदलिया, गीता धनोतिया, गीता पोरवाल, विजयलक्ष्मी महाजन, सरिता गुप्ता, सुधा फरक्या, प्रमिला संघवी, रेखा उदिया, शांति फरक्या, सुमित्रा सेठिया,रानु सेठिया, वंदना धनोतिया, सुनीता सेठिया, ममता रत्नावत, रेखा मांदलिया, ज्योति काला, रेखा पोरवाल, सरोज रत्नावत, निधि गुप्ता, गुणमाला धनोतिया,उमा गुप्ता, मनीषा गुप्ता,मंजू गुप्ता , सुशीला घाटिया, रीना उदिया, सरिता सेठिया, कविता गुप्ता, चंद्रकला फरक्या,अलका गुप्ता, विद्या गुप्ता के साथ समाज की कई महिलाएं व बच्चे उपस्थित थे।