“भगवान तेरा शुक्रिया” मंत्र से हम परमात्मा से जुड़कर आनंद रूपी नवजीवन को प्राप्त कर सकते हैं- विद्युलता दीदी

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*संस्कार दर्शन*
सीतामऊ।जीवन में चार बातों का ध्यान रखना जरूरी है पहला नकारात्मक परिस्थिति में खुश रहना दूसरा स्वयं से बातें करना तीसरा अतीत को भूलना चौथा भगवान से जुड़ना उक्त प्रवचन माला प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीतामऊ में आयोजित दिव्य प्रेरणा शिविर के दूसरे दिवस ब्रम्हाकुमारी विद्युलता दीदी ने कही।
विद्युलता दीदी ने कहा कि नकारात्मक परिस्थिति में खुश रहने के लिए हमें नकारात्मक सोच में को बदलना पड़ेगा हमारा नकारात्मक सोच का भाव बदलकर सकारात्मक ताकि बढ़ेगा सब अच्छा अच्छा दिखेगा तो हम खुश रहने लगेंगे नकारात्मक भाव में रहने से नकारात्मक जीवन जीने लगते हैं हमें हर कोई गलत लगने लगता है ऐसे में बार-बार गुस्सा आना हर किसी के प्रति जलन की भावना बढ़ना मानसिक विकार होना बीमारियों का आना आदि से जीवन खुश रहने के बजाय दुखी रहने लगता हैं। दूसरे बिंदु स्वयं से बातें करना पर विद्युलता दीदी ने बताया कि हर रोज काम ही काम करते करते थक जाते हैं शहरों से चारों ओर से मानसिक दबाव चिंताओं से घिरे रहते हैं ऐसे में हम अपने शरीर स्वास्थ्य आदि पर ध्यान नहीं दे पाते हैं हमें को समय निकालकर हम कैसे हैं ध्यान योग करते हुए अपने आप से बातें करना चाहिए।
विद्युलता दीदी ने तीसरे बिंदु अतीत को भूलना पर विस्तार से बताते हुए कहा कि जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों के बाद एक अच्छा अवसर प्राप्त होता है। कठिनाइयां जीवन की परीक्षा होती है हमें बार-बार इन परीक्षाओं को याद करने के बजाए परीक्षा से उत्तीर्ण होकर अच्छा ही प्राप्त हुई उसका आनंद के अनुभूति प्राप्त करना चाहिए। दीदी ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जिस प्रकार से एक दही बड़े को बनाने के लिए उसको कहीं प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। चने को पिसने के बाद बेसन बनता है बेसन को फिर पानी से गिला कर उसके साथ अन्य सामग्री मिर्च नमक आदि मिलाकर दही बड़े का आकार दिया जाता है फिर उसे गर्म तेल में तला चला जाता हैं। फिर दही बड़ा सबसे खाने योग्य बन जाता है और हम बोलते हैं कि वह क्या लाजवाब दही बड़ा बना है। ऐसे ही हमारा जीवन भी कई कठिनाई से गुजरता और हम चुप चाप सहते हुए आगे बढ़ते हैं तो हम भी परिवार समाज के लिए लाजवाब बन जाते हैं।
चौथे बिंदु कनेक्ट टू गॉड, भगवान से जुड़ना पर विद्युलता दीदी ने कहा कि हमें अपने मतलब से दूर हट कर भगवान से जोड़ना चाहिए जीवन में सब कार्य करो पर कुछ समय भगवान से भी जुड़ने के लिए निकालना चाहिए। सुबह मंदिर जाकर पूजा पाठ करते हुए और भगवान से अपनी मांग मन्नत रख देते हैं पर यह भूल जाते हैं कि शाम को सोते समय उसका धन्यवाद शुक्रिया अदा कर दे। जिस प्रकार से हमने रिश्तेदारी नातेदारी निभानी होती हैं तो उनकों समय-समय पर घर में आयोजित कार्यक्रमों आदि में याद करना बुलाना और उन्हें फोन लगाना नहीं भूलते हैं। सभी हमारे रिश्तेदार हमसे जुड़े रहते हैं। और वह भी हमें याद करते हैं। ऐसे ही अच्छे अवसर पर तथा जब भी खुशी का असर हो उस परमात्मा बाबा को याद करना चाहिए। जिससे हमारा बाबा से नाता जोड़ा रहे और बाबा समय-समय पर हमें भी खुशियों का आशीर्वाद प्रदान करता रहें। हमको प्रतिदिन परमात्मा कि सुबह में ध्यान आराधना तो रात को सोते समय उसका शुक्रिया धन्यवाद देना चाहिए कहना चाहिए कि भगवान तेरा शुक्रिया धन्यवाद। जिस प्रकार से भगवान का शुक्रिया मंत्र बोल -बोल कर एक बूढ़ा बाज पक्षी अपने पंख नाखूनों चोंच आदि नये आ जाते हैं वैसे ही हम भगवान का धन्यवाद शुक्रिया अदा करते हैं तो परमात्मा हमें हर कठिनाई से बचाता है और नव जीवन प्रदान करता है।
एक उदाहरण के माध्यम से दीदी ने समझाइश देते हुए कहा कि एक राजा ने अपने प्रजा से हीरें जवाहरात संपत्तियों का ढेर लगाते हुए कहा कि जो कोई जिस संपत्ति पर अपना हाथ रखेगा वह संपत्ति उसकी हो जाएगी। यह सुनकर एक बालक वहां आया और उसने संपत्तियों के ढेर के चारों ओर चक्कर लगाया किसी पर हाथ नहीं रखा। राजा सहित सब लोग देख रहे थे। सभी चकित थे कि इसने कुछ भी नहीं चुना और बाहर निकल कर उसने राजा के कंधे पर हाथ रख दिया। सबने चकित होकर ऐसा क्यों किया तुमने इतनी संपत्ति छोड़कर राजा पर हाथ रखा। तो बालक ने कहा जब राजा हाथ रख कर अपना हो गया तो सभी संपत्ति अपनी हो गई।
ऐसे ही हम अपनी इच्छाओं को प्राप्त करने के लिए परछाई की तरह पकड़ने के लिए जीवन बिता देते हैं पर जब हम भगवान को प्राप्त करने के लिए आगे की ओर बढ़ते हैं तो परछाई पीछे पीछे आती है। जो भगवान परमात्मा को प्राप्त कर लेता है उसकी सब इच्छाएं पूर्ण हो जाती है।
प्रवचन माला के पश्चात नगर परिषद सभापति श्रीमती राधा सोनी संपादक लक्ष्मीनारायण मांदलिया ने अपने अपने आध्यात्मिक विचार रखते हुए कहा कि जीवन के आनन्द के लिए ज्ञान चक्षु का खुलना जरुरी है। और ज्ञान चक्षु को खोलने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीतामऊ द्वारा निरंतर प्रेरणा शिविरों मेडीटेशन कोर्स आदि के माध्यम से दीदीयों द्वारा विभिन्न आयोजनों को आयोजित कर किया जाता है। ऐसे आयोजनों में हर व्यक्ति अपने परिवार को जुड़ना चाहिए।
आयोजन में बहिन कृष्णा दीदी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। बहिन प्रीती दीदी और भ्राता गौरव जैन ने नगर क्षेत्र के नागरिकों माताओं बहनों से अनुरोध करते हुए कहा कि दिव्य प्रेरणा शिविर दो सत्र सुबह 8 बजे से एवं शाम 5 बजे से प्रारंभ होता है।जिसमें पधार कर ज्ञानार्जन कर स्वयं व परिवार में खुशियों के दीप प्रज्वलित करें।