खुशी पाने के लिए भगवान कि पूजा करते हैं पर वह खुशी थोड़े समय मिलती,पर जब पद,पैसा चिंता सब परमात्मा पर छोड़ देते तो खुशी जुड़ीं रहती है – ब्रह्माकुमारी ऊषा दीदी

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीतामऊ का 15 वें वर्ष का वार्षिकोत्सव संपन्न
संस्कार दर्शन
सीतामऊ। हमने चार बार ॐ शान्ति इसलिए बोला जिन्होंने बाबा लिए अपना योगदान दिया कार्य किया है। पहली बार ॐ शान्ति स्वर्गीय ओमप्रकाश भाईजी ने मंदसौर के विद्यालय को सजाया संवारा और सीतामऊ सेटर के लिए भूमि लेने के कार्य किया। दुसरी ऊं शांति स्वर्गीय कमला दीदी 10 दिसंबर को चलें गये उन्होंने मंदसौर को सजाने संवारने में बहुत योगदान दिया उनका सान्निध्य मार्गदर्शन हमें मिला। तिसरीॐ शान्ति हमारे इंदौर झोन कि निर्देशिका हेमा दीदी है जिन्होंने कमला दीदी के बाबा के धाम जाने के बाद सभी कार्यों को अच्छे से संभाल रखा है। चौथा ॐ शान्ति हमारी स्व समिता दीदी जिनका हमारे लोंकिक परिवार में भी मार्गदर्शन किया वो मुझसे तन मन से जुड़े हुए थे। उन्होंने मंदसौर सेंटर में भी सेवाएं दी। पांचवां ॐ शान्ति आप सभी उपस्थित के लिए जिनको बाबा का आशीर्वाद मिलता रहे। आज के 15 वर्ष प्रभु उपहार भवन के हो गए हैं और जो बाबा से जुड़े हुए भक्त हैं। उन पर बाबा का आशीर्वाद सदैव बना रहे। उक्त उद्बोधन ब्रह्मकुमारी ऊषा दीदी इंदौर ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीतामऊ सेंटर के 15 वें वर्ष के वार्षिकोत्सव समारोह में व्यक्त किए।
ऊषा दीदी ने आगे कहा कि जैसा कि आज के चकाचौंध के युग में बाबा का परचम भी चल रहा है।परमात्मा से जुड़ने के लिए हमें नीमित बनाया है। सभी बहिनें भी बाबा से जुड़ कर हमारे बीच में निमित बनीं है। दीदीयां पूज्यनीय है। आगे महाशिवरात्रि आ रही है। हम शिव बाबा का आक धतूरा आदि से पूजन करते हैं। हम पूजा खुशी पाने के लिए करते हैं। पर खुशी हमें सदा के लिए नहीं रहती है क्योंकि हमें पद पैसा कि चिंता रहती है। इनके रहते हमारी खुशीया नहीं आ सकतीं हैं इसलिए परमात्मा को सब कुछ चिंता उसको छोड़ देते दे देते हैं तो वह सब खुशियां दे देता है। पर अपने आप को जानना पड़ेगा कि मैं कौन हूं मेरा कौन है।यह जानना पड़ेगा।
दीदी ने कहा कि मैं कौन हूं यह जानना है तो शरीर कि आत्मा चेतन्य आत्मा है। और शरीर केवल पंच तत्व का पुतला है पर जब इसमें चेतन्य आत्मा आतीं हैं तो शरीर कि पहचान है।
ऊषा दीदी ने कहा कि जब किसी को हॉस्पिटल ले जाते हैं और उसकी आत्मा चली जाती है तो डॉक्टर बोलते हैं कि डेट बॉडी ले जाओ, जब आत्मा थी तो उसका नाम था। मैं ,मैं ,मेरा सब दिखावा है। जब आप इस लोक से चलें गये तो सब संबंध भी चलें जातें हैं। हमारे जीवन में तीन संबंधों से खुशी समृद्धि आतीं हैं। अपने आप और अपने संस्कारों को समझ और पहचान समय पर कर लिया तो दुःख नहीं आता है। जब समय चला जाता है तो पछताने के अलावा कुछ नहीं रहता है।तो आइए अभी समय नहीं गया। हम परमात्मा कि स्वर्णिम दुनिया कि और चल रही थीम पर उंगली पकड़कर चलें।आप सब राज योग मेडीटेशन से जुड़े और इस प्रयोग शाला में जुड़ कर स्वर्णिम दुनिया में चलें।
समाजसेवी श्री अशोक जैन (विवेकानंद) ने कहा इस आयोजन में आकर लगता है कि सारे संसार का आनंद ब्रह्माकुमारी में यहां है। जैसा बहिनों का लिबास है यह अपने आप में शांति का प्रतीक है। यहां पर आध्यात्मिकता से खुशी का अनुभव होता है। वह कही पर नहीं मिलता है। हममें सिखने कि प्रवृति है तों हमें जीवन में छोटे बच्चों से भी शिक्षा मिलती है।यह आश्रम सभी के ज्ञान आध्यात्मिक का केंद्र बनें और बाबा का आशीर्वाद मिलता रहे।
ब्रह्माकुमारी हेमा बहिन ने कहा कि परमात्मा कोन है और उनके क्या क्या नाम रखें है। सब अलग अलग नाम से याद करते हैं।भगवान को याद करने के सबके अपने अपने कारण होते हैं। कुछ लोग मंदिर जाते पूजा अर्चना करते हैं उन्हें भोग लगाते ये हमारे संस्कारों में मिला है। हम भगवान को कुलदेवता को अपनी समस्या लेकर आगे दुःख नहीं आए इसलिए कुछ मांगने को लेकर भगवान को याद करते हैं। हम जैसे मां को याद करते हैं वैसे ही हम परमात्मा से परिचय संबंध रखते हैं तो हम सब कुछ मिल जाता है।जब किसी को अपने माता पिता से परिचय नहीं है तो संबंध नहीं है और संबंध नहीं है तो हमें प्राप्ति नहीं हो सकती है। यह वार्षिकोत्सव इसलिए आयोजित किया है कि हम आपको परमात्मा से आपका परिचय कराते हैं।आप अपने अनुभव कर परमात्मा से जुड़े।
ब्रह्माकुमारी श्यामा दीदी मंदसौर ने कहा कि बहिनें केवल बहिनें ही नहीं बहिनें पूज्यनीय है जो कन्या है और दूसरा महत्व हम संन्यासी को देते हैं जो दीदीया संन्यासियों का कार्य भी कर रही है। और हम ब्रह्मचारी कि भी पूजा करते हैं तो दीदीया ब्रह्मचारी है जिन्हें ब्रह्माकुमारी कहते हैं। ऐसी सभी दीदीयों का चरण जहां पड़ते हैं वहां सुख समृद्धि आती है। और आज छोटी काशी में दीदीयो के चरण पड़े हैं।यह सीतामऊ के सुख समृद्धि मंगल हो एसी हम कामना करते हैं।
नगर परिषद उपाध्यक्ष श्री सुमित रावत ने कहा कि दीदीयों लगातार मेहनत का प्रतिफल है कि आज हम भव्य आश्रम बाबा का बन कर तैयार है। हम यहां योग आध्यात्म ध्यान का अनुपम केंद्र है। मैं माउंट आबू गया वहां मुझे बहुत कुछ सिखने को मिला। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय पुरे देश में जो सेवाएं दे रहे हैं वह हम सब को सिखने के ज्ञानार्जन के विश्वविद्यालय है।
ब्रह्माकुमारी श्रुति दीदी ने कहा कि दुनिया में दुःख बढ़ता जा रहा है। बाबा कहते हैं कि खुशी से ज्यादा खुराक नहीं। बाबा अपनी नई नई विधि से खुश रहने कि बताते हैं। बाबा कहते हैं कि सभी बाबा के पास आए और ज्ञान दर्शन करें।प्रेम संपत्ति और स्वास्थ्य तीनों दरवाजे पर खड़े हैं किसको बुलाएंगे सास ससुर स्वास्थ्य को पति संपत्ति और बच्चे प्रेम को बुलाने को कहा तो महिला ने प्रेम को दरवाजे से घर में प्रवेश कराया।तो बाकी दो और साथ आ गये। कहने का अभिप्राय कि जहां प्रेम है वहां सब कुछ प्राप्त हो जाता है।
इस अवसर पर पार्षद श्रीमती राधा सोनी, भाजपा नेता श्री राजेन्द्र राठौर ने भी संबोधित किया।
आयोजन के प्रारंभ में उपस्थित अतिथियों और दीदीयो का डुपट्टा पहनाकर स्वागत अभिनंदन किया।
स्वागत सम्बोधन ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी ने देते हैं सेटर कि सेवाओं कि जानकारी दी।
इस अवसर पर सीतामऊ सेंटर के पंद्रहवें वर्ष में प्रवेश पर समाजसेवी श्री अशोक जैन विवेकानंद नगर परिषद उपाध्यक्ष श्री सुमित रावत भाजपा नेता श्री राजेन्द्र राठौर रामनिवास केरवा पार्षद श्रीमती राधा सोनी पूर्व पार्षद श्रीमती माया चावड़ा ब्रह्माकुमारी ऊषा दीदी इंदौर श्यामा दीदी मंदसौर स्वीती बहिन मंदसौर ऊषा बहिन शामगढ़, हेमा बहिन गरोठ ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी प्रीति बहिन सीतामऊ डॉ राजमल सेठिया डॉ नीतिन सेठिया, संपादक लक्ष्मीनारायण मांदलिया पत्रकार सुरेश गुप्ता संजय व्यास अम्बालाल मकवाना, वरिष्ठ समाजसेवी श्री दिनेश जोशी मंदसौर आदि ने मोमबत्ती जलाकर दीप प्रज्वलित किया और केक काटकर जन्मोत्सव मनाया गया। समारोह में कुमारी लक्ष्मी नाटाराम ने सुस्वागतम गीत और कुमार मनाली ने हेप्पी बर्थडे गीत पर नृत्य प्रस्तुति दी।
समारोह में विशिष्ट जनों को संस्था का कैलेंडर और गिफ्ट कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर सीतामऊ नगर क्षेत्र के अलावा मंदसौर नीमच पिपलिया मंडी इंदौर आदि क्षेत्रों से आए महिला पुरुषों ने बाबा के भक्तों ने आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त कर संस्था के ध्वज के नीचे खड़े होकर सभी उपस्थित जनों ने स्वर्णिम दुनिया कि ओर बाबा कि ऊंगली थामने का संकल्प लिया। आयोजन का संचालन गौरव जैन ने किया।