आलेख/ विचारमंदसौरमध्यप्रदेश

‘सामाजिक समरसता का प्रतीक गोवर्धन परिक्रमा यात्रा

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मातृशक्ति सहित 700 यात्री आज जाएंगे गोवर्धन परिक्रमा यात्रा में,

50 व्यवस्थापकों का दल हुआ एक दिन पहले रवाना

मंदसौर, चौदह साल पूर्व से शुरू हुई गोवर्धन परिक्रमा यात्रा ने इस बार नए रंगों में रंग बदलते हुए आज महिलाओं सहित 700 यात्रियों को समर्पित करते हुए सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण प्रतीक बना लिया है। इस विशाल स्वरूप में हुई परिक्रमा यात्रा में इस बार रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज हुई है, और नगर व अंचल के 700 से अधिक यात्री गोवर्धन परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं।

गोवर्धन परिक्रमा यात्री दल के सहभागी एवं मीडिया सहयोगी नरेंद्र धनोतिया एवं राजेश पाठक ने इस समर्पण से भरी यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार पहली बार मातृशक्ति को भी शामिल किया गया है और लगभग 100 से अधिक महिलाएं इस यात्रा में भाग लेंगी। यात्रा में शामिल होने वाले यात्री 10 से 75 वर्ष आयु वर्ग से हैं।जिन्होंने 6 माह पहले से यात्रा के लिए पंजीयन कराया था ।

नरेंद्र धनोतिया और राजेश पाठक ने बताया कि तीन दिवसीय परिक्रमा यात्रा में सांवरिया सेठ मंडफिया  दर्शन, वृंदावन, मथुरा, और गोवर्धन पर्वत परिक्रमा  शामिल हैं। सभी वर्गों के यात्री द्वारा बनाए गए समूह ने मंदसौर की सामाजिक समरसता का प्रतीक बनाया है, जहां ऊंच नीच और भेदभाव के बिना सहयात्री इस परिक्रमा में भाग लेते हैं।

इस परिक्रमा यात्रा के लिए छह महीने से अधिक समय से रेलवे आरक्षण, तीर्थ स्थानों के दर्शन, परिक्रमा मार्ग, ठहरने, भोजन, आवास, परिवहन और अन्य सुविधाएं योजनाबद्ध ढंग से कराई गई हैं। नामजद सूचना और उपयुक्त व्यवस्था सभी यात्रियों को प्रदान की गई हैं। व्यवस्था में लगे 50 व्यवस्थापकों का दल एक दिन पूर्व ही बस के माध्यम से गंतव्य पर रवाना हो चुका है। मंदसौर के गांधी चौराहे पर स्थित विश्वपति शिवालय पर अग्रिम पहुंचने वाले दल का ढोल, जयकारों से अभिनंदन कर रवाना किया गया है।

सांवरिया सेठ के दर्शन के साथ शुक्रवार को सभी यात्री 23 दिसंबर, प्रातः मथुरा पहुंचेंगे। सुबह के सत्र में जमुना जी में चुनरी मनोरथ उत्सव होगा, जिसमें यात्रियों के माध्यम से एकत्र चुनरी की कोई 1681  फीट लंबी चुनरी तैयार की गई है जो 50  नावों पर यमुना नदी के चौड़े पाट पर ले जाकर औढाई  जाएगी।

24 दिसंबर को प्रातः से श्री गोवर्धन परिक्रमा आरंभ होगी, जिसमें गोविंद कुंड, दानघाटी, देव स्थान और ब्रज क्षेत्र शामिल होंगे। श्रीकृष्ण के जन्मभूमि स्थान का दर्शन भी इस परिक्रमा यात्रा में शामिल है।

गोवर्धन परिक्रमा और ब्रज यात्रा का धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक, साहित्य, सांगीतिक, और सामाजिक महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ, उसने लोकचेतना को जड़ों से जोड़कर एक अद्भुत और आनंददायक यात्रा का माहौल बना दिया है।

नरेंद्र धनोतिया और राजेश पाठक ने कहा कि यह सनातन संस्कृति देव दर्शन के साथ जन जन को जोड़ने का सेतु है, जो चौदह सालों से जारी है। कोई 60 से अधिक सहयात्री निस्वार्थ भाव से इस परिक्रमा में भाग लेते हैं और पिछले साल भी कोई 350 यात्री गोवर्धन परिक्रमा पर गए थे।

समस्त धर्म यात्री मंदसौर स्टेशन पर सुबह  10 बजे एकत्रित  होंगे , जहां  पर उनको शुभकामनाएं देने वाले सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों में काम करने वाले अनेकों समाज सेवी पहुंचेंगे । साथ ही  अनेक सुधीजनों, गणमान्य व्यक्तित्वों ने मंदसौर  अंचल की सबसे बड़ी और श्रद्धा पूर्ण परिक्रमा यात्रा के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।

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