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इच्छाओं को नियंत्रित रखना सफलता का मंत्र – संत श्री ज्ञानानंदजी महाराज

केशव सत्संग भवन में चल रहे है चार्तुमासिक प्रवचन
मन्दसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में चातुर्मास हेतु ज्ञानानंदजी महाराज हरिद्वार विराजित है। संतश्री द्वारा केशव सत्संग भवन में श्रीमद भागवत कथा के एकादश स्कंद का वाचन किया जा रहा है।
सोमवार को धर्म सभा में संतश्री ज्ञानानंदजी महाराज ने बताया कि शास्त्रों में परमात्मा में बताया कि हमारा काम हैं कर्म करना फल की इच्छा नहीं रखना, हमें सिर्फ कर्म करते चले जाना है। आपने बताया कि यदि जीवन में सफल होना है इच्छाओं को नियंत्रित रखों व्यक्ति सांसारिक जीवन की मोह माया में पकडकर अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता और दुखों का भागी बनता है।
संतश्री ने बताया कि व्यक्ति मैं और मेरा, तू और तेरा में पडा है यदि बंधन का मुख्य कारण है। यदि हमें सांसारिक मोह माया से छुटकारा पाना है तो अहम् से बाहर आना होगा और अपने आप को प्रभु के प्रति समर्पित करना होगा। आपने बताया कि अहंता बंधन का प्रमुख कारण है। ईश्वर को भी अहंकारी व्यक्ति पसंद नहीं होते है इसलिए जब भी प्रभु के पास जाओं अहंकार त्यागकर जाओं।
आपने बताया कि भगवान का भजन करने के लिए कोई विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं होती है बस सच्चे मन से अपने आप को प्रभु के प्रति समर्पित कर देना चाहिए। आपने प्रभुभक्ति के बारे में बताया कि हमें शुद्ध भाव से भगवान की भक्ति करना चाहिए बिना किसी अपेक्षाओं के। धर्मसभा में संतश्री ने ज्योत से ज्योत जलाते चलों….. प्रेम की गंगा बहाते चलो भजन भी उपस्थित श्रोताओं के साथ गाया।
धर्मसभा के अंत में भगवान की आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर केशव सत्संग भवन के अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया, पं शिवनारायण शर्मा, राव विजयसिंह, घनश्याम भावसारमदनलाल गेहलोत, प्रवीण देवडा, इंजि आर सी पाण्डेय, राधेश्याम गर्ग, पं शंकरलाल त्रिवेदी, भगवतीलाल पिलौदिया, उमेश सोनी, कृष्णगोपाल सोनी, शिवशंकर सोनी सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।

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