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चरम पर टकराव ! CM नीतीश ने RJD कोटे के मंत्रियों से बनाई दूरी….बिना मंत्री के ही मुख्यमंत्री ने कर ली मीटिंग

 

चरम पर टकराव ! CM नीतीश ने RJD कोटे के मंत्रियों से बनाई दूरी….बिना मंत्री के ही मुख्यमंत्री ने कर ली मीटिंग

 

पटना

 

बिहार सरकार के कामकाज में राजद के मंत्रियों का कोई रोल नहीं है. क्या राजद कोटे के मंत्रियों का अपने विभाग में भी कोई अधिकार नहीं है. मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों से यही संकेत मिल रहा है. नीतीश कुमार ने आज बिहार में धान खरीद को लेकर बैठक बुलायी. बैठक में कृषि औऱ सहकारिता विभाग के सचिव तो मौजूद थे लेकिन मंत्रियों को नहीं बुलाया गया. नीतीश ने सीधे सचिव को अपना आदेश सुनाया।

बता दें कि बिहार में धान खरीद का मामला सीधे तौर पर दो विभागों से जुड़ा होता है. कृषि विभाग औऱ सहकारिता विभाग. धान की उपज का हिसाब किताब कृषि विभाग के जिम्मे होता है. वहीं, खरीदने की जिम्मेवारी पैक्सों की होती है जो सहकारिता विभाग के अधीन आता है. बिहार के कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत और सहकारिता मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव हैं. दोनों राजद कोटे से मंत्री है।

नीतीश कुमार ने सोमवार की शाम धान खरीद पर बैठक बुलायी, जिसमें कृषि औऱ सहकारिता विभाग के सचिव मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी से अब तक हुई धान खरीद की जानकारी ली. सचिव वंदना प्रेयसी को ही सीएम ने ये दिशा निर्देश दिया कि आगे धान खरीद के लिए क्या करना है।

मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के सचिव एन. सरवन कुमार को किसानों के लिए सरकारी योजनाओं को सही से अमल में लाने का निर्देश दिया. उन्हें मुख्यमंत्री से ये टास्क मिला कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए अभियान चलायें. किसानों को ये बतायें कि जो अपने खेत में पराली जलायेंगे सरकार उनसे धान नहीं खरीदेगी।

तेजस्वी को भी निमंत्रण नहीं

धान खरीद पर सीएम की बैठक की खास बात ये भी रही कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को भी इसमें बुलाया गया. वैसे भी जेडीयू-राजद की सरकार आने के बाद सीएम की समीक्षा बैठक में राजद कोटे के मंत्रियों को नहीं बुलाने की परंपरा शुरू हुई है. बिहार में जब तक जेडीयू-बीजेपी की सरकार थी तब तक मुख्यमंत्री की हर समीक्षा बैठक में संबंधित विभाग के मंत्री मौजूद रहते थे।

अगर वह विभाग बीजेपी कोटे के मंत्री के अधीन आता था तो उसमें डिप्टी सीएम को बुलाया जाता रहा है. लेकिन राजद के साथ जेडीयू की सरकार बनने के बाद नयी परंपरा की शुरूआत हुई है, जिसमें विभागों की समीक्षा बैठक में राजद के मंत्रियों के साथ साथ डिप्टी सीएम को भी नहीं बुलाया जा रहा है।

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