मंदसौरमंदसौर जिला
अ.भा. साहित्य परिषद ने किया राम काव्य पाठ का आयोजन

‘‘पांच बरस के रामलला, मंदिर बना विशाल, मोहनी मूरत देख, नयन हुए निहाल’’
सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने सभी को किया भाव विभोर
मन्दसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मंदसौर इकाई के द्वारा रामलला प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर राम काव्य पाठ का आयोजन जिला धार्मिक उत्सव समिति के विनोद मेहता, कन्हैयालाल सोनगरा, सुभाष गुप्ता, श्रीमती अर्चना गुप्ता के मुख्य आतिथ्य एवं वरिष्ठ कवि महंत गोपाल बैरागी, वैभव वंदन बैरागी, नंदकिशोर राठौर, नरेन्द्र भावसार, ललित बटवाल, नरेन्द्र त्रिवेदी, अजय डांगी, चंदा डांगी, हरिओम बरसोलिया, राजेन्द्र तिवारी, धु्रव जैन, उज्जवल बारेठ, सीमा शर्मा, पूजा शर्मा, सुनील राठौर, भजन गायक चेतन व्यास, स्वाति रिछावरा एवं राजकुमार अग्रवाल के सानिध्य में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के द्वारा रामजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं नंदकिशोर राठौर द्वारा राम स्तुति ‘‘श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भव भय दाुरूणम’’ से हुई। वैभव वंदन बैरागी ने ‘‘अब जन्म भूमि पर मंदिर है और राम राज्य का दर्शन है‘‘ कविता सुनाकर राम प्राण प्रतिष्ठा के अवसर को सार्थक किया। गोपाल बैरागी ने ‘‘तुलसी मेरे राम को रीझ भजो या खीज’’ तुलसी की चौपाई सुनाकर राम नाम के महत्व को प्रतिपादित किया।
नन्दकिशोर राठौर ने ‘‘पांच बरस के रामलला, मंदिर बना विशाल, मोहनी मूरत देख के नयन हुए निहाल’’ कविता सुनाकर रामलला को मोह लेने वाली प्रतिमा का बखान किया। नरेन्द्र भावसार ने ‘‘मैं उस पथ पर चलने आया हूं जिस पथ पर श्री राम चले’’ कविता सुनाकर राम पथ का अनुसरण करने की प्रेरणा दी। अजय डांगी ने ‘‘दशपुर के लोगों आओ, सब राम उत्सव मनाओं’’ कविता सुनाकर माहौल उत्सव का बनाया। ललित बटवाल ने ‘‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’’ शास्त्रीय संगीतमय भजन सुनाया। पूजा शर्मा ने गीत ‘‘आज लहर राम की चली, सजी है नगर की गली-गली’’ सुनाया। सीमा शर्मा ने ‘‘एक गुण भी धारण कर पाऊ, सच्चे भक्त कहलाऊ’’ सुनाई।
धु्रव जैन ने हनुमानजी का संजीवनी प्रसंग पर कविता ‘‘हे सूरज इतना याद रहे संकट तुम्हारे वंश पे है’’ सुनाकर लक्ष्मणजी के प्राण बचाने में हनुमान की भूमिका को रेखांकित किया। उज्जवल बारेठ ने ‘‘विश्व गुरू है हम गुरूओं ने भारत का मान बढ़ाया है, हम भारतवासियों ने सीने में राम बसाया है’’ कविता सुनाई। राजेन्द्र तिवारी ने ‘‘राम नाम है तारण हार, राम की लीला अपरम्पार’’ मालवी भजन सुनाया। चंदा डांगी ने कविता ‘‘नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो’’ सुनाई। सुनील राठौर ने ‘‘एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घर में लेटा’’ कविता सुनाई। सुरेन्द्र शर्मा ने ‘‘वो धनुष राम ने तोड़ा, जिसको महाबली हिला न सके’’ मुक्तक सुनाया।
हरिओम बरसोलिया ने ‘‘राम नाम की महिमा’’ गीत सुनाया। स्वाति रिछावरा ने गीत ‘‘तुम्ही आशा, तुम्ही विश्वास हमारे’’ सुनाया। राजकुमार अग्रवाल ने गीत ‘‘सजा दो नगर को दुल्हन सा मेरे श्रीराम आये है’’ सुनाया। चेतन व्यास ने गीत ‘‘सुख के सब साथी दुख में न कोई’’सुनाया। अंत में सभी ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ कर वातावरण को राममय कर दिया। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया एवं आभार नरेन्द्र त्रिवेदी ने माना।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के द्वारा रामजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं नंदकिशोर राठौर द्वारा राम स्तुति ‘‘श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भव भय दाुरूणम’’ से हुई। वैभव वंदन बैरागी ने ‘‘अब जन्म भूमि पर मंदिर है और राम राज्य का दर्शन है‘‘ कविता सुनाकर राम प्राण प्रतिष्ठा के अवसर को सार्थक किया। गोपाल बैरागी ने ‘‘तुलसी मेरे राम को रीझ भजो या खीज’’ तुलसी की चौपाई सुनाकर राम नाम के महत्व को प्रतिपादित किया।
नन्दकिशोर राठौर ने ‘‘पांच बरस के रामलला, मंदिर बना विशाल, मोहनी मूरत देख के नयन हुए निहाल’’ कविता सुनाकर रामलला को मोह लेने वाली प्रतिमा का बखान किया। नरेन्द्र भावसार ने ‘‘मैं उस पथ पर चलने आया हूं जिस पथ पर श्री राम चले’’ कविता सुनाकर राम पथ का अनुसरण करने की प्रेरणा दी। अजय डांगी ने ‘‘दशपुर के लोगों आओ, सब राम उत्सव मनाओं’’ कविता सुनाकर माहौल उत्सव का बनाया। ललित बटवाल ने ‘‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’’ शास्त्रीय संगीतमय भजन सुनाया। पूजा शर्मा ने गीत ‘‘आज लहर राम की चली, सजी है नगर की गली-गली’’ सुनाया। सीमा शर्मा ने ‘‘एक गुण भी धारण कर पाऊ, सच्चे भक्त कहलाऊ’’ सुनाई।
धु्रव जैन ने हनुमानजी का संजीवनी प्रसंग पर कविता ‘‘हे सूरज इतना याद रहे संकट तुम्हारे वंश पे है’’ सुनाकर लक्ष्मणजी के प्राण बचाने में हनुमान की भूमिका को रेखांकित किया। उज्जवल बारेठ ने ‘‘विश्व गुरू है हम गुरूओं ने भारत का मान बढ़ाया है, हम भारतवासियों ने सीने में राम बसाया है’’ कविता सुनाई। राजेन्द्र तिवारी ने ‘‘राम नाम है तारण हार, राम की लीला अपरम्पार’’ मालवी भजन सुनाया। चंदा डांगी ने कविता ‘‘नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो’’ सुनाई। सुनील राठौर ने ‘‘एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घर में लेटा’’ कविता सुनाई। सुरेन्द्र शर्मा ने ‘‘वो धनुष राम ने तोड़ा, जिसको महाबली हिला न सके’’ मुक्तक सुनाया।
हरिओम बरसोलिया ने ‘‘राम नाम की महिमा’’ गीत सुनाया। स्वाति रिछावरा ने गीत ‘‘तुम्ही आशा, तुम्ही विश्वास हमारे’’ सुनाया। राजकुमार अग्रवाल ने गीत ‘‘सजा दो नगर को दुल्हन सा मेरे श्रीराम आये है’’ सुनाया। चेतन व्यास ने गीत ‘‘सुख के सब साथी दुख में न कोई’’सुनाया। अंत में सभी ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ कर वातावरण को राममय कर दिया। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया एवं आभार नरेन्द्र त्रिवेदी ने माना।