कोई भी हवन यज्ञ आदि करता तो बिना अग्नि के हवन में अगर आहुति देता है तो वह राजा बलि को लगती-पं. नागर

सुयश रामायण मंडल का तत्वाधान में चल रही चौथे दिवस की कथा में उज्जैन से पधारे पंडित मनोहर नागर ने कहा कि जब समुद्र का मंथन हुआ तो उसमें से जहर निकला था और उस जहर को शिव ने धारण किया था तभी शिव को नीलकंठ कहलाए आप सबको शायद यह पता नहीं होगा वह जहर समुद्र में कैसे आया क्योंकि एक राजा ने मारकंडे ऋषि को सूली पर चढ़ा दिया था तभी उनके भाई ने जो वह भी साधु थे उन्होंने हाथ में जल लेकर उक्त राजा को श्राप दिया और जल धरती के बजाय समुद्र में डाल दिया था वही जल जब समुद्र मंथन हुआ तो जहर के रूप में बाहर निकाला और उसी जहर को शिव ने धारण किया था आपने बताया कि भगवान ने जब वामन अवतार लेकर बलि राजा से तीन पग जमीन मांगी थी तो उसके बदले भी उन्हें तीन वरदान भी दिए थे जिसमें पहले वरदान में उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया था मैं दूसरे वरदान में उन्होंने कहा था कि कोई भी हवन यज्ञ आदि करता है तो बिना अग्नि के हवन में अगर आहुति देता है तो वह राजा बलि को लगती है और तीसरा वरदान आपने कहा कि कोई भी कर्मकांड पूजा करवाते वक्त हाथ में जो कलेवा बांधते है वह राजा बलि का नाम लेकर ही बांधना जाता है यह तीन वरदान भगवान विष्णु ने राजा बलि को दिया था ऐसे कई वृतांत गुरुदेव ने सुनते हुए कृष्ण और उसी के अंतर्गत राम कथा का सारांश बताया तत्पश्चात कृष्णजन्म महोत्सव का भी वृतांत सुनाया और इस अवसर पर लोगों ने बड़ी धूमधाम से कृष्ण जन्म उत्सव में आनंद लेते हुए पंडाल में सब नाचते हुए नजर आए इस अवसर पर अतिथियों ने दिन में पोथी पूजन किया