अपराधमंदसौरमध्यप्रदेश

मिली भगत से हो रहा स्ट्रीट लाइट घोटाला, बिना किसी विज्ञप्ती / कोटेशन के लग जाता मिलने वाले की फर्म का 3 गुना अधिक बिल ?

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पूर्व में लगी लाइट का अता-पता नही, पर नई का करवा दिया भुगतान

बिल्लौद/विकास जैन

सरकार तो गांव के विकास को लेकर अनेको जतन कर रही हे और विकास कार्य में कोई कमी नही रहे जिसको लेकर राशी भी समय समय पर भेजती हे लेकिन सरकार में ही बैठे भ्रष्ठ अधिकारी/ कर्मचारी अपनी आदतो से बांज नही आते हे , और सरकार की राशी आने का इन्तजार करते हे ।

हम बात कर रहे हे जिले में लग रही स्ट्रीट लाइट की जो की भारी भरकम बिलों के साथ ग्रामीण अंचल में लगाई जा रही स्ट्रीट लाइट/ हाई मास्क लाइट की जिसमे इंजनीयर अपने मिलन सारो से मिलकर पंचायत में इस्टिमेट बनाकर टी एस बनाता हे और सरपंच सचिव से लेकर ठेकेदार तक कमीशन में मूल्यांकन होता हे जिसमे 900 रुपए में आने वाली लाइट का बिल 2700 तक पहुँच जाता हे यह सब खेल इंजनियर करवाता हे जो की सारे नियमो को ताक पर रख कर किये जाते हे जिससे ग्रामीण अंचल में हर पोल पर लाइट रात भर तो ठीक दिन भर भी चल रही हे और न ही पंचायत कोई निविदा पेपर में देते हे और नही किन्ही दुकानदारो से कोटेशन मंगवाते हे मिलने वालो की दुकान से बिल लिया , लालच में आकर सरपंच सचिव ने लगाया और इंजनियर ने मूल्यांकन किया।

इस तरह से अंचल में आटे में नमक नही नमक में ही आटा डाला जा रहा है। जब इस सन्दर्भ में इंजनियर से बात करो तो बोले इसका यही सिस्टम रहता हे बिना विज्ञप्ति/कोटेशन के भुगतान किया जा सकता हे। जो की पंचायतो में 4 से 5 लाख तक पहुँच जाता हे जबकि पूर्व में रहे सरपंचो ने भी स्ट्रीट लाइट लगवाई थी उनका तो कोई अता पता नही पर नई टी एस बनाकर डबल से 4 से 5 लाख से भी अधिक के मूल्यांकन पंचायतो में हो रहे ।

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