मंदसौरमध्यप्रदेश

प्रदेश भर के आरबीएसके आयुष चिकित्सक 15 को पहुंचेंगे NHM भोपाल

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मध्यप्रदेश में जहां एक ओर चिकित्सकों की कमी है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग एक नया नजारा सामने आ रहा है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश भर में चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के आयुष चिकित्सको को अब चिकित्सीय कार्य का नही बल्कि लैब टेक्नीशियन के तर्ज पर खून की जांच साथ ही डाटा एंट्री ऑपरेटर के तर्ज पर कोबो टूल पर एंट्री करने का आदेश विभाग द्वारा जारी किया गया है।

कोरोना की वैश्विक महामारी में प्रदेश के इन आरबीएसके आयुष चिकित्सकों ने तन मन एवं प्राणों की परवाह किए बगैर मध्यप्रदेश के आम जनता की सेवा की है और अपने चिकित्सक होने का हर फर्ज निभाया है। और इसी दौरान आरबीएसके आयुष चिकित्सकों ने अपने कई साथी चिकित्सकों को कोरोना महामारी में योद्धा के रूप में आमजन की सेवा करते हुए खोया है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश-

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है ।जो एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है और एकलौता ऐसा कार्यक्रम है जिसमें जरूरत मंद गरीब बच्चों का इलाज पूर्णतः नि:शुल्क होता है इस कार्यक्रम की शुरुआत मध्यप्रदेश में वर्ष 2013 में हुई थी। इसमें प्रदेश के प्रत्येक जिले एवं उसके प्रत्येक विकासखण्ड में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ टीम कार्य करती हैं मोबाइल हेल्थ टीम में चार सदस्य एक पुरुष आयुष चिकित्सक एक महिला आयुष चिकित्सक एक फार्मासिस्ट एक एएनएम होते हैं जिनका कार्य आंगनवाड़ी एवं स्कूल में जाकर 0 से 18 वर्ष के समस्त बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना होता है ।आरबीएसके आयुष चिकित्सक बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे में कोई गंभीर बिमारी या कोई कमी ,अनियमितता, विकासात्मक विकलांगता तो नही है अगर ऐसे बच्चे स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकों को मिलते हैं तो इन बच्चों के पालको को बीमारी की जानकारी और इलाज संबंधित परामर्श आयुष चिकित्सकों द्वारा देकर जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र जिला चिकित्सालय में आगे इलाज के लिए रेफर किया जाता है। किसी बच्चे की गंभीर बीमारी हदय रोग कटे फटे होंठ या अन्य कोई सर्जरी होती है तो चिकित्सकों द्वारा बच्चों का फालोअप भी किया जाता है।

वर्ष 2015-2016 में भारत में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर आरबीएसके आयुष चिकित्सकों का अहम योगदान-

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में इन आयुष चिकित्सकों की मेहनत का नतीजा रहा है कि मध्यप्रदेश का आरबीएसके कार्यक्रम पूरे भारत वर्ष में 2015-2016 में प्रथम स्थान पर आया है ।आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम दुर्गम ग्रामीण इलाकों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करतीं है और बीमार बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण करके चिन्हित कर इलाज करवाने में अपनी भूमिका निभाती हैं। इस कार्यक्रम से मध्यप्रदेश कटे फटे होंठ ,तालू मुक्त ,एवं क्लब फुट मुक्त हो चुका है ‌‌।

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का सपना कर रहे साकार-

प्रदेश आरबीएसके चिकित्सकों के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान जी के स्वप्न को साकार करने की पहल जारी है जिसमें मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना एवं मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना के तहत हदय रोग से पीड़ित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका इलाज कराया जा रहा है आयुष चिकित्सक दुर्गम इलाकों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं एवं हृदय रोग से ग्रस्त बच्चों को चिन्हित कर रहे हैं ।जिनमें कई बच्चों के माता पिता तक को जानकारी नही होती है कि उनका बच्चा हदय रोग से पीड़ित हैं ऐसे पालकों को आयुष चिकित्सक मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना की जानकारी देकर नि:शुल्क इलाज की सलाह समझाईश देते हैं।

वैश्विक कोरोना में कोरोना योद्धा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका-

कोरोना महामारी के दौरान जब पुरा भारत वर्ष कोरोना महामारी से जुझ रहा था तब प्रदेश में इन आरबीएसके आयुष चिकित्सकों ने वैश्विक महामारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया था ।बाहर से आए हुए व्यक्तियो की स्क्रीनिंग से लेकर कोरोना मरीजों की दिन रात स्वास्थ्य सेवा की है आमजन को महामारी के प्रति जागरूक किया है।

डाक्टर से बना दिया डाटा एंट्री ऑपरेटर और लेब टेक्नीशियन-

एनएचएम विभाग ने कोरोना योद्धा चिकित्सकों को बना दिया लैब टेक्नीशियन और डाटा एंट्री ऑपरेटर और‌ एक ऐसा फरमान जारी किया जिसमें चिकित्सकों को प्रतिदिन,100 बच्चों का हीमोग्लोबिन टेस्ट करना है और 100 बच्चों की एंट्री भी चिकित्सकों को ही करना है चिकित्सकों को 100 बच्चों की खून की जांच करने का बेतुका फरमान जारी कर दिया और नही करने पर चिकित्सकों का वेतन रोका जा रहा और अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश जारी किए जा रहे।

इस बात से व्यथित प्रदेश के सभी आयुष चिकित्सकों ने संगठन के माध्यम से 15 मार्च को एक दिन का सामुहिक अवकाश लेने का निर्णय लिया है ।संगठन के माध्यम से मिशन संचालक महोदया से इस अव्यवहारिक आदेश को निरस्त करने एवं अन्य मांगों पर चर्चा करने वार्तालाप का प्रयास किया जा रहा था मगर माननीय की व्यस्तता के कारण समय नहीं मिल पाया। प्रदेश संगठन के आह्वान पर प्रदेश के सभी आर बी एस के आयुष चिकित्सक सामूहिक अवकाश लेकर 15 मार्च को NHM कार्यालय पहुंच कर अपनी मांग रखेंगे।

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