मंदसौरमध्यप्रदेश
पानी वाले बाबा के नाम प्रसिद्ध ‘जलपुरुष’ राजेंद्रसिंह ने की चर्चा, किया नई पीढ़ी को जोड़ने का आह्वान

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जल पुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में सार्थक संस्था करेगी जल संरक्षण के कार्य

मन्दसौर। देश में वाटरमैन के नाम से प्रसिद्ध जलपुरुष राजेंद्रसिंह रविवार 21 अप्रैल को सार्थक सोशल वेलफेयर सोसाइटी के आव्हान पर मंदसौर आए।
21 तारीख को सार्थक संस्था की फाउंडर डॉक्टर उर्मिला तोमर एवं सार्थक के बड़ी संख्या में उपस्थित सदस्यों के साथ मंदसौर के ग्रामीण अंचल में भ्रमण के दौरान पानी के क्षेत्र में जमीनी कार्य करने की संभावनाओं को तलाशा।
विभिन्न क्षेत्रों के 6 से अधिक तालाबों, एवं बड़े जलाशयों का निरीक्षण किया। सार्थक संस्था की ऊर्जावान और सक्रिय टीम के साथ में काम करने और मार्गदर्शन देने के प्रति अपनी सहमति व्यक्त की। दिनांक 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित उद्यानिकी महाविद्यालय के सभागृह में जल पुरुष श्री राजेंद्र सिंह द्वारा सभागृह में उपस्थित जन समूह के समक्ष सार्थक संस्था के साथ काम करने और मार्गदर्शन देने की सार्वजनिक घोषणा भी उनके द्वारा की गई।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में मंदसौर जिले के क्षेत्र के किसान नगर के ऐसे प्रबुद्ध नागरिक जो सामाजिक सरोकारों में और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में अपनी रुचि रखते हैं वे उपस्थित थे। नगर पालिका अध्यक्ष रामादेवी गुर्जर एवं इनरव्हील क्लब की सचिव श्रीमती शर्मिला बसेर एवं समाज के अन्य वर्गों से भी महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में रतलाम जिले से डॉ खुशाल सिंह भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। पृथ्वी दिवस के इस अवसर पर सार्थक संस्था द्वारा मंदसौर जिले के ऐसे कृषकों को सम्मानित किया गया जो अपने नवाचारों से जल संरक्षण और जैविक उत्पादों में रुचि ले रहे है एवं पृथ्वी के प्रति प्रकृति के प्रति संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम के पश्चात वाटर मैन श्री राजेंद्र सिंह उद्यानिकी महाविद्यालय के संवाद कक्ष में मीडिया से रूबरू हुए। यहां उन्होंने जल व पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनुभव व कई अहम सुझाव साझा किए। मंदसौर की पहचान शिवना नदी की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की।
मॉनिटरिंग के सवालों पर सिंह ने कहा करोड़ों खर्च होने के बाद भी शिवना नदी की स्थिति अच्छी नहीं। वाटरमेन सिंह ने कहा कि शिवना नदी शुद्ध तभी होगी, जब शहर का एक भी गंदा नाला नदी में नहीं मिलेगा। देश में करीब 85 साल पहले ही नदियों को दूषित करने का काम शुरू हो गया था। 1932 में कमिश्नर हॉकिन्स ने बनारस में एक गंदे नाले को गंगा से जोड़ने का आदेश जारी किया था। इसके बाद से नदियों को गंदे नालों से जोड़ा जा रहा है।
शिवना से जलकुंभी हमेशा के लिए हटाने के लिए गाद को निकालना पड़ेगा। एनएसएस यूनिट, जियोग्राफी व सोशल साइंस के छात्र और पर्यावरण के शिक्षक मिलकर शिवना नदी की पब्लिक रिपोर्ट तैयार करें। काम शुरू करने से पहले नदी के उद्गम से लेकर इतिहास के बारे में जरूर जाने। शिवना नदी को लेकर जनयात्रा भी निकाली जाए।
– जलसरंचनाओं की जमीन का उपयोग अन्य किसी काम के लिए नहीं हो सकता।
तेलिया तालाब, शिवना नदी सहित अन्य जल स्रोतों पर अतिक्रमण की शिकायतों पर डॉ. सिंह ने कहा कि 25 जुलाई 2001 के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश है कि जल संरचनाओं की जमीन का उपयोग अन्य किसी के लिए नहीं किया जा सकता है। इस दौरान डॉ. सिंह ने पर्यावरण प्रेमियों को संकल्प भी दिलवाया। पर्यावरणविद् डॉ. खुशालसिंह पुरोहित रतलाम, उद्यानिकी महाविद्यालय के डीन आरएस चुंडावत, सार्थक संस्था की संस्थापक डॉ. उर्मिला तोमर सहित अन्य पर्यावरणविद नगर के गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।
कार्यक्रम में शासकीय महाविद्यालय के छात्रों ने वालंटियर के रूप में कार्य करते हुए बहुत कुछ सीखा और जाना। संचालन डॉ वीणा सिंह एवं श्रीमती छवि तोमर द्वारा किया गया, तकनीकी सहयोग संस्था के डायरेक्टर श्री सौरभ सिंह ने किया, श्री नरेन्द्र त्रिवेदी द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने के योगदान के लिए सभी का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में सार्थक की समस्त टीम पूरी ऊर्जा से रजिस्ट्रेशन से लेकर पूर्ण आतिथ्य तक जुटी रही।