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अरवलिया भामा में श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव में झुम उठें भक्त
संस्कार दर्शन
आलोट । समीपस्थ ग्राम अरवलिया भामा में चल रही सप्त दिवसीय भागवत ज्ञान गंगा के चतुर्थ दिवस में भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव मनाया गया ।
पंडित श्री कैलाश नारायण शर्मा माऊखेडा़ सीतामऊ ने कथा का रसपान कराते हुए कहा की श्री कृष्ण का जन्म जेल में हुआ और जन्म लेते ही गोकुल पहुंच गए जन्म किसी और मां ने दिया पालन किसी और ने किया और 6 दिन के हुए पूतना राक्षसी मारने आ गई संकटा सूर बकासुर अघासुर का वध किया । उज्जैयिनी में सांदीपनी ऋषि के यहां शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर फिर गोकुल छोड़कर वृंदावन जाना पड़ा वहां से फिर अपने माता पिता को जेल से छुड़वाने के लिए मथुरा गए। जहां मामा कंस के द्वारा चली गई चालो का सामना करते हुए। आखिरी में कंस का वध किया। जरा संध ने आक्रमण कर दिया मथुरा छोड़ कर के द्वारिका नगरी बसाई 1 दिन भी शांति से नहीं रहे कौरव पांडव में युद्ध हो गया। युद्ध में सत्य के साथ यानी पांडवों के साथ रह कर उनको जिताया। कहने का तात्पर्य है कि भगवान भी इस धरा धाम पर आए तो उनको भी बहुत सारे कष्ट आए इसलिए जीवन में कष्ट आते रहेंगे परंतु जिस प्रकार भगवान ने मुस्कुराते हुए समस्त समस्याओं का सामना किया उसी प्रकार से भगवान हमें संदेश देते हैं कि मनुष्य जीवन ही संघर्ष है जीवन की समस्याओं मैं समाधान ढूंढना पड़ता है और परमात्मा की कृपा से प्रभु भक्ति करते हुए जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है परमात्मा की भक्ति हर समस्या का समाधान है।