नागदामध्यप्रदेश

मजदूर की मौत का असली मुजरिम कौन, ग्रेसिम की राख लील गई एक जिंदगी

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 शासकीय भूमि पर राख उसमें दबा मजदूर

त्वरित टिप्पणी- कैलाश सनोलिया

नागदा। शहर में आज सोमवार को एक दिल दहलाने वाली घटना हुई। ग्रेसिम उद्योग के पावंर प्लांट से निकलने वाली राख के एक बरसों पुराने ढेर के गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई। यह ढेर शहर से बाहर एक शासकीय भूमि पर है। बारिश के थपेडों को खाकर यह ढेर इतना मजबूत हो गया कि उस पर पैड- पौधें पनप गए। इस ढेर से कुछ लोगों ने राख का खनन कर उससे ईट बनाकर कमाई का जरियां बना लिया है। बरसो पुराने इस ढेंर में अपने पेट की आग बुझाने के लिए मजदूरी करने गया अजय पिता भारत दब कर मर गया। यह हादसा ढेर को खोदते समय हुआ और राख का एक हिस्सा गिर गया। इस ढेर में एक मजदूर और घायल हुआ। उसे बचा लिया गया। यह घटना सोमवार को हुई। प्रशासन ने कड़ी मशक्त के बाद जेसीबी मशीन से दबे मजदूरों को मलवे से बाहर निकाला। जब उसे बाहर निकाला तब उम्मीद थी वह बच जाएगा लेकिन बाद में उसकी संास उखड़ गई। यह राख के ढेर के तार बिड़ला ग्रेसिम उद्योग से जुडे़ है। ग्रेसिम की मशीनों का संचालन के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। कोयले को जलाकर पांवर प्लांट चलता है। उससे उपजी राख को ग्रेसिम आज से लगभग 35 बरस पहले शहर के बाहर फेंक देता l

O राखोडे पर अब तो राजनेताओं की नजर –

हालांकि इन दिनों तो ग्रेसिम उद्योग भारत सरकार पर्यावरण विभाग की एक अधिसूचना के कारण ईट व्यवसायी को राख बेचकर कमाई भी कर रहा है। ग्रेसिम की राख से उच्च क्वालिटी की ईटें बनता है। यह राख लेने के लिए राजनेताओं की नजर रहती है। लेकिन बरसों पहले यह प्रथा नहीं थी। इस कारण किसी जमाने में ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन ने जो राख एक स्थान पर डाली थी वह अब बारिश से जम गई है। एक पहाड़ के आकार में बडे- बडे टीले खडें है। आज भी कुछ लोग राख के इन टीलों से राख का खनन कर कमाई करते है। जो मजदूर मौत का शिकार हुआ वह मजदूरी करने गया था। वह अंदर एक टैक्टर के समेत दबा।

O असली मुजरिम कौन-

जैसा पुलिस बोल रही हैकि कल प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा। किसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होगा। जिस मालिक के यहां मजदूरी करने अजय गया था उसके खिलाफ प्रकरण कायम करेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह हैकि जिस भूमि पर बरसों पहले ग्रेसिम ने राख डाली थी वह किसकी है। जैसा बताया जा रहा हैकि यह सरकारी जमीन है। ग्रेेसिम उद्योग प्रबंधन इस भूमि का मालिक कैसे बना और किसकी अनुमति से बरसों पहले राख को यहां पर डाला गया। उद्योग जब किसी भी स्थान पर डाला जाता है तो उससे जुडे अपशिष्ट पदाथो को डिस्पोजल करनें की जिम्मेदारी उद्योग प्रब्रंधन की होती है। जो राख यहां पर है उसकी मात्रा हजारों टन में है। किसी समय तो यह गर्मी के दिनों में उड़कर जनता के साथ खिलवाड़ भी करती रही। लेेकिन यहां के सारे जो जिम्मेदार तथा कथित सत्ता के सुरमा है उनके काम घंधों का जाल इस ग्रेसिम उद्योग में ऐसा फैला हैकि वे खामोश रहते है। कांग्रेस हो या भाजपा सबकी स्वार्थ की मौहब्बत ग्रेसिम प्रबंधन से है। खामियाजा जनता को तो भुगतना पड़ता अजय जैसे मजदूर को भी जिदंगी से हाथ घोना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में अब प्रशासन की जिम्मेदारी हैकि शासकीय भूमि पर बिना अनुमति के इस प्रकार की जोखिम खड़ी करने वाले असली मुजरिमों को कटघरे में खड़ा करें। आज देखने में आया राजनेता वहां पहुंचे थे यह एक अच्छी पहल थीकि किसी की जान बचाने के लिए वहां मौजूद रहे लेकिन इन राजनेताओं की भी अब जिम्मेदारी हैकि जिस मां ने अपने बेटे को खोया है जिस बहिन का भाई चला गया उसके असली गुनाहगार को सजा मिले। बडा गुनाहगार तो ग्रेसिम प्रबंधन है। जोकि पर्यावरण विभाग के कानून कायदों को ताक में रख कर शहर के लोगों की जान के साथ इस प्रकार से खिलवाड़ कर रहा है। बडी बात यह हैकि किसी समय में ग्रेसिम इस ढेर के पास पहरे दार खडा करती थी लेकिन यह व्यवस्था बरसो पहले बंद कर दी गई। यह भी एक जांच का बड़ा विषय है।

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