
डीएम और एसपी ने किया प्लेस ऑफ सेफ्टी का निरीक्षण
बिहार औरंगाबाद से धर्मेंद्र गुप्ता
जिला पदाधिकारी सह-अध्यक्ष जिला निरीक्षण समिति एवं पुलिस अधीक्षक और निरीक्षण समिति के अन्य सदस्य यथा- सिविल सर्जन के प्रतिनिधि, जिला टीकाकरण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्था० (शिक्षा), बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य एवं सहायक निदेशक, बाल संरक्षण इकाई-सह- सदस्य सचिव एवं अन्य के द्वारा समाज कल्याण विभाग के अन्तर्गत किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 49 के अधीन संचालित सुरक्षित स्थान औरंगाबाद का निरीक्षण किया गया।
उक्त संस्थान में बिहार के 11 विभिन्न जिलों के 16 वर्ष से अधिक आयु के जघन्य अपराधों में लिप्त किशोर एवं 18 वर्ष से अधिक आयु के विचाराधीन मामलों में लिप्त किशोर संवासित है जिनकी वर्तमान संख्या 119 है जो कि गृह की
आवासन क्षमता 50 से बहुत अधिक है। संवासितों के विरुद्ध उक्त संस्थान में कार्यरत कर्मियों की संख्या कम है।
निरीक्षण के दौरान चारों वार्डों के संवासितों से बातचीत की गई, उनके खान-पान, शिक्षण, खेल-कुद एवं अन्य संबंधित मामलों की जानकारी ली गई। सभी संवासितों ने खान-पान, शिक्षण, खेल-कूद एवं अन्य सेवा से संतुष्टि जाहिर की। इसके बाद बभण्डी में ही देखरेख एवं संरक्षण के जरुरतमंद 200 बच्चों (0 से 21 वर्ष के 100 बालक एवं 100 बालिका) हेतु निर्माणाधीन वृहत आश्रय गृह का भी निरीक्षण किया गया।
उक्त आश्रय गृह का लगभग 60 प्रतिशत निर्माण कार्य सम्पन्न हो चुका है जिसे जून 2023 तक सम्पन्न किया जाना है। तत्पश्चात शहर के कर्मा रोड में बी.एल. इण्डों स्कूल के सामने स्थित ‘आरोहण’ विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान (Specialized Adoption Agency) का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उक्त संस्थान में 09 बच्चे (विशेष आवश्यकता वाले 03 बच्चे सहित) आवासित थे। समन्वयक, सामाजिक कार्यकर्त्ता, आया आदि सभी कर्मी मौजूद थे।
निरीक्षण के समय एक छः माह की बालिका का स्थानीय आंगनबाड़ी सेविका एवं महिला पर्यवेक्षिका द्वारा अन्नप्राशन कराया जा रहा था। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 65 के अधीन विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान में 0-6 वर्ष के देखरेख एवं संरक्षण के जरुरतमंद 10 बच्चों का आवासन कराया जाता है। जिले के अनाथ निराश्रित एवं परित्यक्त बच्चे जिनके माता / पिता / अभिभावक / रिश्तेदार की खोज नहीं की जा सकती वैसी बच्चों को दत्तकग्रहण विनिमय 2022 के प्रावधानानुसार उपयुक्त दम्पति को कानूनी रूप से गोद दिया जाता है। अवैध रुप से गोद लेना एवं देना दंडनीय अपराध है।
अनाथ निराश्रित एवं परित्यक्त बच्चों को गोद देने हेतु जिले में विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान फैसिलिटेशन सेन्टर के रूप में कार्य करती है। गोद लेने वाले कोई भी इच्छुक दम्पति अपना ऑनलाईन निबंधन Central Adoption Resource Authority के बेवसाईट पर करा सकते हैं। गोद लेने देने की सारी प्रक्रिया ऑनलाईन है। उक्त मौके पर जिला पदाधिकारी द्वारा संस्थान में मौजूद कर्मियों को आवासित बच्चों का उपयुक्त तरीके से देख-भाल करने हेतु निदेशित किया गया।
जिला पदाधिकारी द्वारा सभी आम जनों से अपील किया जाता है कि बच्चे को असुरक्षित तरीके से नहीं फेकें बल्कि उसे ‘आरोहण’ विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान के बाहर लगे झूले में, किसी अस्पताल में अथवा पुलिस थाना में ही रखें। सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ-साथ निजी अस्पताल संचालक एवं कर्मचारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों के प्राप्त होते ही इसकी सूचना बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई को दें अथवा समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। जानकारी छुपाने अथवा अवैध तरीके से बच्चे को किसी को गोद देने अथवा बेचने आदि की सूचना प्राप्त होने पर उस व्यक्ति के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।