
ताल ब्यूरो चीफ –शिवशक्ति शर्मा
समीपस्थ ग्राम मुण्डला कलां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आए प्रसंग शराब ,मांस, दहेज,मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं ने समाज के विकास को जकड़ लिया है । जिससे परिवारों का आर्थिक विकास नहीं हो पा रहा है।
इससे प्रेरित होकर सामाजिक कुप्रथाओं को त्यागने में राजपूत समाज को उदाहरण बनना पड़ेगा । समाज में परिवर्तन लाना समय की अत्यंत आवश्यक आवश्यकता है। क्यों कि इससे समाज में सकारात्मक सोच लाने पर सामाजिक विकास होना संभव है। आयोजित कथाएं भी समाज सुधार का महत्वपूर्ण काम करती है। कथा श्रवण कर्ता स्वयं सुधरेंगे तभी समाज सुधरेगा और धर्म के प्रति आस्था जागृत होगी। अतः समय के साथ अपनी सोच को बदलने की नितांत आवश्यकता है। यह प्रसंग ग्राम मुंडला कलां में राजपूत धर्मशाला में आयोजित भागवत कथा के सातवें दिन अतिथि के तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता नारायण सिंह चिकलाना ने उपस्थित धर्मालुओं को संबोधित करते हुए कही । इस मौके पर नारायण सिंह द्वारा धर्म पर आधारित सारगर्भित संबोधन से प्रेरित होकर गांव के सात युवाओं ने व्यसन मुक्त होकर बिना दहेज मांगे विवाह करने का संकल्प लिया।
उक्त समारोह मे दहेज विरोधी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विरेन्द्रसिंह सिसोदिया ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में मतभेद हो तो चलेगा किंतु मनभेद नही होना चाहिए एवं सामाजिक कुरीतियां प्रतिबंधित होनी चाहिए। धर्म भी यही कहता है। इसके पश्चात समाजसेवी घनश्याम सिंह डोडिया द्वारा संत श्री अशोक शर्मा का सम्मान किया गया एवं कुरूतियों से मुक्ति का संकल्प लेने वाले युवाओं का फतेह सिंह डोडिया, जोरावर सिंह डोडिया, भैरुसिंह डोडिया, मंगल सिंह डोडिया ने पुष्प माला पहनाकर स्वागत किया व उनके संकल्प की प्रसंशा कर अन्य अधिक से अधिक युवाओं को भी प्रेरित करने की बात कही।
कथा वाचन प्रतिदिन पंडित अशोक शर्मा रुपड़ी वाले ने किया। कथा के समापन पर पूर्णाहूती व आरती सम्पन्न होने के पश्चात प्रसादी वितरण कार्य संपन्न हुआ। कथा में गांव के सभी समाज जनों ने सहयोग दिया व धर्मलाभ लिया। आभार दशरथ सिंह डोडिया ने व्यक्त किया। उक्त जानकारी महेन्द्रसिंह डोडिया ने दी एवं कथा श्रवण कर्ताओं व व्यसन त्यागी युवकों को साधुवाद दिया।