श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को श्रवण कर भावविभोर हुए धर्मालुजन

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श्री सुयश रामायण मण्डल जनता कॉलोनी के तत्वावधान में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
मन्दसौर। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्री सुयश रामायण मण्डल जनता कॉलोनी के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन संजय गांधी उद्यान में हो रहा है। श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन की सुश्री दीपज्योतिजी धर्मालुजनों को प्रतिदिन दोप. 12.30 से सायं 5 बजे तक कथा श्रवण करा रही है। श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस सुश्री दीप ज्योति के मुखारविंद से धर्मालुजन ने भगवान श्री कृष्ण की बाललीलाओं को श्रवण कर भावविभोर हो गये और प्रसन्नता के भाव में कई बार नृत्य किया।
सुश्री दीप ज्योतिजी ने कहा कि श्रीमद् भागवत में श्री कृष्ण की जो बाल लीलाओं को श्रवण करना चाहिये। कृष्ण की बाललिलाएं मन को प्रसन्नता का अनुभव कराती है। जीवन में जब भी अवसर मिले कृष्ण की बाललिलाओं के प्रसंग को श्रवण करें और अपने जीवन को भक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर करे।
इन्द्र का अहंकार तोड़ा-श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस सुश्री दीप ज्योतिजी ने कृष्ण के द्वारा इन्द्र के अभिमान को तोड़ने की कथा भी सुनाई गई। जिसके अनुसार इन्द्र ने गोवर्धन पर्वत की पूजा गोकुलवासियों के द्वारा किये जाने पर सात दिवस तक घनघोर वर्षा के कारण गोकुलवासी परेशान हो गये तब कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी गोकुलवासियों को वर्षा से बचा लिया। कृष्ण की इस लीला से इन्द्र का अभिमान टूट गया और तभी से गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई।
कालिया नाग के आतंक से बचाया गोकुलवासियों को-सुश्री दीपज्योतिजी ने सुनाया कि गोकुल के पास यमुना नदी में कालिया नाग व उसके वंशजों का डेरा था। कालिया नाग के कारण लोग यमुना नदी के पानी में स्नान करने एवं उसके पास जाने से डरते थ्ज्ञे। कृष्ण ने अपनी लीलाएं करते हुए कालिया नाग को पराजित कर उसे यमुना नदी को छोड़कर जाने को विवश किया।
स्वर्ग की नहीं बेकुण्ठ की कामना करे- सुश्री दीपज्योतिजी ने कहा कि स्वर्ग नरक की कल्पना अपने जगह सत्य है, लेकिन स्वर्ग की कामना से अधिक हमें बेकुण्ठ मिले ऐसी कामना करे ताकि हमें प्रभु विष्णु जो कि इस जगत के पालनहार है उनकी कृपा मिले। स्वर्ग की कामना छोड़ हमे बेकुण्ठ की कामना करना चाहिये। बेकुण्ठ में जो सुख है वह स्वर्ग में भी नहीं है।