आदिवासी पिता पुत्र की हत्या से आक्रोशित दलित समाज ने किया कलेक्टर का घेराव

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मंदसौर। पिछले दिनों मन्दसौर जिले के ग्राम अलावदा खेड़ी में रहने वाले मजदुर आदिवासी परिवार पर गांव के दबंगों ने जानलेवा हमला किया था। हमले में गम्भीर रूप से घायल पिता कारूलाल भील और पुत्र सिमुन भील को इलाज हेतू उदयपुर रेफर किया गया था । जहां पर इलाज के दौरान बारी बारी से पुत्र सिमून भील और पिता पारूलाल भील की मृत्यू हो गई।
इस विभत्स हत्याकांड से समूचे दलित और आदिवासी समुदाय में प्रशासन को लेकर जो नाराजी थी ! उसका ग़ुस्सा आज कलेक्टर गौतमसिंग के सामने फूटा । इस घटना को लेकर अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार के नेतृत्व में कल रात से ही दलोदा स्थित प्रताप रिसोर्ट पर सैकड़ो की संख्या में दलित कार्यकर्त्ता जुटने लगे थे।
आज सुबह हजारों की संख्या में दलित आदिवासी कार्यकर्त्ता समाजजन रैली के रुप में शहर के मध्य स्थित बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूरे शहर में पैदल मार्च किया।और 8 किलोमीटर चलकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचे ।
यहां पर पूर्व से आंदोलनकारियो का इंतजार कर रहे कलेक्टर गौतम सिंग को ज्ञापन सौंपकर मांग की इस जघन्य हत्याकांड के आरोपियों को फांसी और शेष आरोपियों की जांच कर गिरफ़्तारी करने के साथ ही पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रूपए मुआवजा राशि के साथ ही पीड़ित परिवार में किसी एक सदस्य को शासकीय नौकरी मिले।कलेक्टर ने समाजजनों के आक्रोश को देखते हुए तत्काल मृतक आश्रितों को 16,50,000 सोलह लाख पचास हजार रुपए स्वीकृत किए और अतिरिक्त राशि और शासकीय नौकरी के लिए मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से निहालचन्द मालवीय अशोक खींची, सावन मकवाना(पाल्या मारू), सुरेश चौहान, अर्जुन मालवीय, कैलाश मालवीय, समाजसेवी संगीता पाटोदी, रेखा जी सोलंकी, निर्मला वानखेड़े, मधुलिका जाधव, जयश्री भालसे, अंकिता साल्वे, गुड्डू जी मालवीय, रोहित नरवले, जितेन्द्र मालवीय, ओमप्रकाश परमार, नवीन राठौड़, कन्हैयालालजी, जमुना लाल, दिलीप पंवार, रोहित आंजणा, महेन्द्र सुनेल, अरविन्द मुंडला, रितेश मालवीय, हेमराज चौहान, राजकुमार मालवीय, धीरज पाटिल, कृष्णपाल सोलंकी, मिश्रीलाल चौहान, कैलाश गेहलोत, दिलीप वर्मा, दिनेश खेड़े, सुमित सौराष्ट्रीय, राहुल परमार, मुकेश परमार, देवानंद चौहान, मनीष नायक, सतीश कुमार, जितेंद्र नागवंशी, राज डागर, मुकेश मालवीय, सुभाष नरवले, जीवन राज दांगी, अनिल मालवीय, पिंकी वर्मा, समर्थ मालवीय, रामचंद्र मालवीय, धीरज मालवीय, गोविंद बिलोदिया, रामलाल भील, मनीष परमार, कुंदन पंवार, लखन मालवीय, दिलीप मालवीय, शंभू लोट, देवीलाल भील, प्रीतम कहार, रामलाल भील, अरुण चौहान, मनोज पंवार, रामरतन अटेला, दिनेश पंचोली, नागुलाल चौहान, अर्जुन मालवीय, जगदीश मालवीय, राहुल मेहर, लक्ष्मण खेड़े, रोहित वानखेड़े, रोहित सावनेर, ऋषित मालवीय, प्रशांत चौहान, अंकित हिरवे, रजत चौहान, दीपक चौहान सहित हजारों की संख्या में दलित आदिवासी कार्यकर्त्ता समाजजन मौजूद थे।