पूण्यशाली व्यक्ति को ही भागवत श्रवण का अवसर मिलता है-दिप ज्योतिजी

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मन्दसौर। जब किसी व्यक्ति के कई जन्मों का पूण्य संचित होता है तो ही उसे श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर मिलता है। श्रीमद् भागवत कोई साधारण ग्रंथ नहीं है विश्व के सारे पुराव व ग्रंथ एक तरफ रख दिये जाये और केवल श्रीमद् भागवत दूसरी आरे रखी जाये तो श्रीमद् भागवत का पलड़ा ज्यादा भारी रहेगा। श्रीमद् भावगत वह धर्मग्रंथ है जिसे श्रवण करने के लिये स्वर्ग के देवता भी तरसते है। हम बहुत भाग्यशाली है जिसे श्रीमद् भागवत कथा पान करने का अवसर मिल रहा है।
उक्त उद्गार वृन्दावन की सुश्री दीप ज्योतिजी ने संजय गांधी उद्यान में श्री सुयश रामायण मण्डल द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस मंगलवार को कहे। आपने श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि अपनी मृत्यु से डरे हुए राजा परीक्षित को जब शुकदेवजी महाराज ने यह श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करायी तो वे मृत्यु के भय से मुक्त हो गये। जो भी व्यक्ति जो मृत्यु से डरता है यदि वह पूरे मनोयोग से यह कथा श्रवण करता है तो वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। राजा परिक्षित को जब यह ज्ञात हुआ कि सात दिव के पश्चात तक्षक नाग मुझे डस लेगा और मेरी मृत्यु हो जायेगी तो वे काफी चिंतित हो गये और उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा आश्रय लिया। जीवन में हम पर जब भी संकट आवे हम डरे नहीं श्रीमद् भागवत का आश्रय ले। श्रीमद् भागवत हमें अवश्य ही सकटों से बचायेगी।
सुश्री दीपज्योति ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का अमृत स्वर्ग रूपी अमृत से भी श्रेष्ठ है। स्वर्ग के अमृत से भी भागवत कथा का महत्व ज्यादा है जो भी व्यक्ति श्रीमद् भागवत कथा पूरे मनोयोग से श्रवण करता है वह मृत्यु के भय से मुक्त होता है, साथ ही वह मोक्षगामी भी बन जाता है। आपने कहा कि देवश्री नारद जो भी भगवान विष्णु के प्रिय है उन्होनंे भी अपने प्रभु भगवान विष्णु की लीलाओं को बताने वाली श्रीमद् भागवत को श्रवण किया था। देवश्री नारद को यह कथा सनद कुमारों ने श्रवण करायी थी। इसलिये हमें भी श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने ो मिले योग्य संत या साध्वी से यह कथा अवश्य श्रवण करना चाहिये।
नीमा परिवार ने पौथी पूजन व आरती की- श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस मंगलवार को बाबूलाल नीमा जो कि इस भागवत कथा के सात दिवस क मुख्य यजमान भी है उन्होने परिवार के सदस्यों उज्जवल नीमा, आशीष नीमा व अमित नीमा के साथ भागवत पौथी का पूजन किया व आरती करने का धर्मलाभ भी प्राप्त किया।
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