खेल हमारे अदंर के आज्ञाकारिता, अनुशासन, धैर्य, ईमानदारी और टीम भावना के गुणों को बढ़ावा देता- श्री मालवीय

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सीतामऊ । खेल हमारे अदंर के आज्ञाकारिता, अनुशासन, धैर्य, ईमानदारी और टीम भावना के गुणों को बढ़ावा देता हैं। एक टीम के कप्तान को सभी खिलाड़ियों के विशेषता को समझना चाहिए और गेम को जिम्मेदारी से खेलना चाहिए, वहीं टीम के सदस्यों को अपने साथी की मदद करने तथा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उक्त बात सीतामऊ पब्लिक स्कूल के स्कूल में आयोजित तीन दिवसीय स्पोर्ट्स मीट के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विकास खंड शिक्षा अधिकारी नागुलाल मालवीय ने कहीं उन्होंनेकहा प्रत्येक खिलाड़ी को यह पता होता है कि उसे सदैव खुद से पहले टीम के भले और हित के बारे में सोचना हैं। उन्हें आत्मत्याग, अनुशासन और सहयोग के गुणों के साथ, दूसरों के सामने खुद को प्रस्तुत करना होता हैं। इस तरह, हर खिलाड़ी के अंदर समूह के प्रति मित्रता की भावना उत्पन्न होती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विकासखंड स्त्रोत समन्वयक अधिकारी राकेश आचार्य ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों की तुलना में, वे खेल के माध्यम से ही जीवन के मूल्यों के बारे में अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। आज मैं सभी छात्रों से आग्रह करना चाहता हूं कि वे अधिक से अधिक खेलों तथा गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लें और अपना हुनर दिखाएं। टच स्क्रीन, वीडियो गेम और टेलीविज़न के इस युग में, गेम खेलने के लिए बाहर जाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है यह हम सबको स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आज के समय में सभी आयु समूहों के लोग कंप्यूटर और मोबाइल फोन में ही व्यस्त रहते है, जिसके परिणाम स्वरुप वे आलसी बनते जा रहे है। खेल मनुष्यों में मानसिक थकावट और सुस्ती को खत्म करता है तथा ये व्यक्ति को ताज़गी का अनुभव करने में मदद करता है। ये सभी प्रकार की परिस्थितियों के लिए व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करता है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि संकुल प्राचार्य अजीत त्रिपाठी ने कहा कि खेल के महत्व को गंभीरता से लिया जाना चाहिए तथा इसे शिक्षा के बराबर समझा जाना चाहिए। बच्चों को उनके शुरुआती उम्र से ही इसके लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। छात्रों के बीच अधिक जागरूकता फैलाने के लिए संस्थानों में नियमित अभ्यास और फिटनेस कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए तथा उनके माता-पिता को खेल के महत्व के बारे में जागरुक कराना चाहिए। सभी स्कूलों में खेल के लिए अनिवार्य अवधि होनी चाहिए उन्होने कहा कि खेल, एक व्यक्ति को बेहतर और एक सही दिशा प्रदान करता है। हालांकि, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि चरम पर ले जाने वाले गेम फायदेमंद के बजाय हानिकारक साबित ना हो जाये हैं। खेलों को अच्छे इरादे के साथ खेला जाना चाहिए। एक जोरदार हिट आसानी से हड्डी तोड़ सकता है, इसलिए, खेल को गंभीरता और आनंनद के साथ खेला जाना चाहिए तथा हार के साथ बहादुरी और मजबूती से निपटना चाहिए। खेल रोग और बीमारी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता हैं। यह केवल उन बच्चों के लिए नहीं हैं जो खेल में शामिल है यह वयस्क के लिए भी जरुरी है , क्योंकि उनके लिए भी खेल उतना ही महत्वपूर्ण है। ये व्यक्ति में मनोरंजन, अवकाश, और व्याकुलता के प्रति उसकी सामान्य प्रतिबद्धता की भावना को पैदा करता है इसके कारण वो नकारात्मक विचारों से दूर, सकारात्मकताविचारों को उजागर करने में सक्षम हो पाते हैं। ये समुह में एक दुसरे के प्रति मित्रता की भावना विकसित करता हैं और संबंध स्थिर बनाए रखने में मदद करता हैं।
कार्यकम को संबोधित करते हुए खेल एवम युवा कल्याण विभाग के विकास खण्ड अधिकारी मयूर सिंह राठौर ने कहा की खेलकुद को अतिरिक्त या मनोरंजक गतिविधियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि ये उससे कहीं अधिक हैं। कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के खेलों में जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें केवल एक खेल में ही नहीं बल्कि उससे अधिक खेलो को खेलने का मौका दिया जाना चाहिए, ताकि वे रुचि के साथ अपने पसंदीदा खेल के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें। खेलकुद न केवल मनोरंजन का साधन है बल्कि ये एक खिलाड़ी को कई चीजें भी सिखाता हैं जो उसे जीवन में एक बेहतर इंसान बनने में उसकी मदद करता हैं। खेल एक खिलाड़ी को, जीवन के वैकल्पिक चरणों पर प्राप्त सफलता और असफलता से साझा करने की कला, सामूहिक रूप से किसी समस्या से निपटने, बैक अप लेने तथा महत्वपूर्ण परिस्थितियों में एक दूसरे की मदद करना सिखाता हैं। यह उनके नेतृत्व और टीम के साथ काम करने के गुणों को भी निखारता है। खेलकुद एक व्यक्ति के दिमाग को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करता हैं। जिसके कारण उनकी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और सभी जगहों पर सकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है। यह लोगों को मजबूत, आत्मविश्वासी और कुशल बनाता हैं तथा उसके मानसिक एवं शारीरिक विकास और चरित्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। आज बेहद सफल और प्रसिद्ध खिलाड़ी जैसे अभिनव बिंद्रा, साइना नेहवाल, ज्वाला गुट्टा, सचिन तेंदुलकर, मिल्खा सिंह और सानिया मिर्जा ने अपने जुनून को हासिल करने के लिए खुद को अपने रुचि खेल की ओर समर्पित कर दिया। उनके ध्यान, कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ता ने उन्हें आज प्रतिष्ठित व्यक्ति के रुप में विश्व प्रख्यात कर दिया। उन्होंने जीवन के शुरुआती दिनों में खेलकुद के महत्व को महसूस किया और उसे बहुत गंभीरता से लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल संचालक मुस्तफा हुसैन प्रतापगढ़ वाले ने कहा की आज की समय में तनाव और मानसिक आघात तेजी से विकसित होकर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा हैं। व्यायाम, योग, शारीरिक गतिविधियां, खेल उन्हें इन समस्याओं से दुर ले जाने तथा नेक बनाने में उनकी सहायता करता हैं। खेलकुद व्यक्ति को स्वस्थ और फिट रखने के साथ-साथ, उसके स्वरूप को और बेहतर बनाने तथा शीघ्र निर्णय लेने की दिशा में उनकी मदद करता हैं। इसलिए, हर किसी को खेल के महत्व को समझना चाहिए। युवाओं को खेलों में भाग लेने के साथ-साथ इसे अपने करियर के रूप में चुनना चाहिए। खेल मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें इससे किसी भी कीमत पर अलग नहीं किया जाना चाहिए ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में माँ सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया ।प्रतियोगिता में ओवर आल चेम्पियन शिप ब्लू हाउस को मिली शव। दो दिवसीय स्पोर्ट मीत में विध्यालय के सभी बच्चो ने पार्टिसिपेट किया । आउटडोर गेम , इंडोर गेम, क्लास गेम, आदि मिलकर कुल 59 खेलो का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर विध्यालय के प्राचार्य श्रीमती डॉ शेरे बानो ने स्वागत भाषण देकर विद्यालय की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया ।कार्यक्रम का संचालन विध्यालय के हेड गर्ल आरती राठौर ने किया और आभार प्रदर्शन संगीता श्रीमाल ने माना ।