परसाई एवं हबीब तनवीर जन्मशताब्दी पर होंगे आयोजन

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मंदसौर। हरिशंकर परसाई ने व्यंग विधा के माध्यम से समाज की गंदगी को निकालने का प्रयास किया था। हबीब तनवीर के नाटक समाज का आईना थे। प्रगतिशील लेखक संघ की मंदसौर इकाई अपने इन दोनों पुरखों की जन्म शताब्दी अवसर पर सार्वजनिक आयोजन करेगी।
प्रलेसं मंदसौर इकाई के सचिव दिनेश बसेर ने बताया कि इकाई की एक बैठक संगठन के उपाध्यक्ष डॉ स्वप्निल ओझा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए प्रलेसं राज्य सचिव मंडल सदस्य असअद अंसारी ने कहा कि परसाई ने अपने लेखन के माध्यम से धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक आडंबरों पर प्रहार किया था। हबीब तनवीर को बचपन से ही नज्म लिखने का शौक था। डॉ ओझा ने हबीब तनवीर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तनवीर साहब ने आगरा बाजार, चरणदास चोर सहित अनेक नाटकों के माध्यम से तत्कालीन समाज के मुद्दों को उठाया था। वे राज्यसभा सदस्य एवं पद्म भूषण से सम्मानित थे। लेकिन उन्हें अहंकार छू तक नहीं सका था। प्रलेसं इकाई के वरिष्ठ साथी प्रकाश गुप्ता ने मंदसौर में आयोजित प्रलेसं के राज्य सम्मेलन में तनवीर साहब के शामिल होने की स्मृतियों को साझा किया। दिनेश बसेर ने परसाई की व्यंग्य रचना *अफसर कवि का पाठ किया। हूरबानो सैफी ने अनूपपुर राज्य सम्मेलन में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। जनगीत राजकुमार अग्रवाल ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर अभय मेहता, बृजेश आर्य, हेमंत कच्छावा, आसिम अंसारी,रुहीना सिद्दीकी, जीवन साहू ने भी अपने विचार रखे एवं वरिष्ठ साथी प्रकाश गुप्ता को उनके जन्मदिन पर बधाई दी। आभार माना इकाई कोषाध्यक्ष एम यू अंसारी ने।