भगवान हृदय को देखते है, रूप को नहीं- स्वामी श्री निग्रहाचार्य श्री भागवतानंद गुरू जी

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सात दिवसीय श्री विष्णुमहापुरा दिव्य कथा का मंगलवार को हुआ विराम
मन्दसौर। खानपुरा स्थित रामानुज कोट परिसर में आयोजित हो रही सात दिवसीय श्री विष्णु महापुराण दिव्य कथा का मंगलवार को विराम हुआ।
सप्तम दिवस श्री स्वामी श्री निग्रहाचार्य श्री भागवतानंद गुरू जी के द्वारा दिव्य कथा का श्रवण कराया आज कथा के दिव्य सत्र में श्री गुरू जी ने कहा स्री, गौ का वध करना महापाप है । आप श्री ने कहा एक सत्कर्म स्वयं का और पीढ़ी का उत्थान कर सकते हैं और एक असत्कर्म स्वयं और पीढ़ी का पतन कर सकते हैं।
स्वामीजी ने कहा कि भगवान हृदय को देखते हैं रूप को नहीं क्यों कि भगवान भाव ग्राही है। निर्मल भाव को भगवान कि प्राप्ति सहज होती है ।स्वामीजी ने कहा कि श्रेष्ठ राजा के लक्षण अपने प्राण को त्याग कर प्रजा कि रक्षा करे । सत्य और धर्म की ही विजय होती है। आपने कहा कि सज्जनों कि सदैव सेवा करना चाहिए, सीता राम एक ही तत्व है।
कथा में राम कथा वाचक आचार्य रामानुजजी महाराज, पं. दशरथ भाई, पं. शिवकरण प्रधान का भी मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ।
अंतिम दिवस पौथी पूजन सिंधी समाज के वरिष्ठ दृष्टानंद नैनवानी, नंदू आडवाणी, पुरूषोत्तम शिवानी, भागचंद, डॉ कुशल शर्मा, प्रमोद खीरे, पं. शिवनारायण शर्मा परिवार, प्रवीण शर्मा, विकांश शर्मा, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, महामंत्री हेमंत बुलचंदानी, कन्हैयालाल सोनगरा, भावसार समाज के महेश भावसार, ओम भावसार, महेश भावसार, गिरजा शंकर भावसार, महेंद्र केवड़ा, राकेश उपमन्यु, सारस्वत ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष विष्णु आचार्य, अरुण शर्मा, संध्या शर्मा, सीमा आचार्य, बबली जोशी, गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज से पं. जगदीश लाड़, अखिलेश शर्मा, ब्रजेश जोशी, पंकज उपाध्याय, खगेश लाड़, श्री चौबे, नागेश्वर सोनी नीलम मसाला, रामानुज कोट की ओर से कृष्णचंद्र चिचानी, प्रहलाद काबरा, महेश माहेश्वरी (दुरग), प्रमोद तोषनीवाल, रमेश काबरा, गोपाल पलोड़, जितेंद्र कहार, गोविंद कहार, राजेश सोनी, दिलीप लक्षकार, शुभम लक्षकार, विजय, मुकेश राठौर,मनीष गुप्ता, अजय भाटी, राजू सोनी, प्रथम राठौर आदि ने किया। संचालन ब्रजेश जोशी व सुरेश भावसार ने किया एवं आभार लोकेन्द्र मंगल बैरागी ने माना।